Friday, March 24, 2017

EVM का पहली बार कब इस्तेमाल हुआ?

भारत में सन 1998 में कुछ विधानसभा क्षेत्रों में, फिर 1999 के लोकसभा चुनाव में आंशिक रूप से और 2004 के चुनाव में पूरी तरह से इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन का इस्तेमाल किया गया था. उस चुनाव में 10 लाख से ज्यादा वोटिंग मशीनों का इस्तेमाल किया गया था. वोटिंग मशीनें बनाने की कोशिशें उन्नीसवीं सदी से चल रहीं थीं. चुनाव आयोग ने पहली बार 1977 में इलेक्ट्रॉनिक कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (ईसीआईएल) से ईवीएम को प्रोटोटाइप (नमूना) बनाने के लिए संपर्क किया. छह अगस्त 1980 को चुनाव आयोग ने प्रमुख राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को ईवीएम का प्रोटोटाइप दिखाया. उस समय ज्यादातर पार्टियों का रुख इसे लेकर सकारात्मक था. उसके बाद चुनाव आयोग ने भारत इलेक्ट्रॉनिक लिमिटेड (बीईएल) को ईवीएम बनाने का जिम्मा दिया.

वस्तुतः इस मशीन का पहला प्रयोगात्मक इस्तेमाल 1982 में केरल के पारावुर विधानसभा क्षेत्र के चुनाव में हुआ था. जन प्रतिनिधित्व कानून-1951 के तहत चुनाव में केवल बैलट पेपर और बैलट बॉक्स का इस्तेमाल हो सकता था. पर आयोग ने पारावुर विधान सभा के कुल 84 पोलिंग स्टेशन में से 50 पर ईवीएम का इस्तेमाल किया. इस सीट से कांग्रेस के एसी जोस और सीपीआई के सिवान पिल्लै के बीच मुकाबला हुआ. सिवान पिल्लई ने केरल हाई कोर्ट में एक याचिका दायर करके मशीन के इस्तेमाल पर सवाल खड़ा किए. जब चुनाव आयोग ने हाई कोर्ट के मशीन दिखाई तो अदालत ने इस मामले में दखल देने से इनकार कर दिया. लेकिन जब पिल्लै 123 वोटों से चुनाव जीत गए तो कांग्रेसी जोस अदालत चले गए और अंततः सुप्रीम कोर्ट ने बैलट पेपर से चुनाव कराने का आदेश दिया. दुबारा हुए चुनाव में जोस जीत गए.

इस फैसले के बाद चुनाव आयोग ने ईवीएम का इस्तेमाल बंद कर दिया. सन 1988 में कानून में संशोधन करके ईवीएम के इस्तेमाल को कानूनी बनाया गया. वर्ष 1989-90 में निर्मित इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों का प्रयोगात्मक आधार पर पहली बार नवम्बर, 1998 में आयोजित 16 विधान सभा क्षेत्रों के चुनाव में इस्तेमाल किया गया. इन 16 क्षेत्रों में से मध्य प्रदेश में 5, राजस्थान में 5, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, दिल्ली में 6 विधान सभा निर्वाचन-क्षेत्र थे.

क्या बैलट पेपर वोटिंग अब भी सम्भव है?

ईवीएम की एक बैलटिंग यूनिट में 16 प्रत्याशियों के लिए प्रावधान है. यदि उनकी संख्या 16 से अधिक हो जाए तो पहली बैलटिंग यूनिट के साथ-साथ एक दूसरी बैलटिंग यूनिट जोड़ी जा सकती है. 32 से अधिक हो तो तीसरी और यदि 48 से अधिक हो तो चौथी यूनिट अधिकतम 64 प्रत्याशियों के लिए जोड़ी जा सकती है. यदि चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों की संख्या 64 से अधिक हो जाए तो ऐसे निर्वाचन क्षेत्र में ईवीएम का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता. ऐसे में मत पेटी एवं मत पत्र के माध्यम से पारम्परिक प्रणाली को अपनाना पड़ेगा.

तेलंगाना नाम कैसे पड़ा?

भारत के आन्ध्र प्रदेश से अलग करके एक नया राज्य बना है तेलंगाना. इस इलाके में मान्यता है कि इस इलाके में लिंग के रूप में शिव तीन पर्वतों पर प्रकट हुए. ये हैं कालेश्वरम, मल्लिकार्जुन और द्राक्षाराम. ये पर्वत इस इलाके की सीमा बनाते हैं और इसीलिए इसे त्रिलिंग देश कहा जाता है जो तेलंगाना हो गया है. तेलुगू शब्द की उत्पत्ति भी इसी त्रिलिंग से है. यहाँ की भाषा त्रिलिंग (तेलुगु) कहलाई. 'तेलंगाना' शब्द का अर्थ है- 'तेलुगु भाषियों की भूमि'.

तेनालीराम कौन थे?

तेनाली रामकृष्ण, तेनाली रामलिंगम या तेनाली राम तमिल, तेलुगु और कन्नड़ लोककथाओं का एक पात्र है. सोलहवीं सदी में दक्षिण भारत के विजयनगर राज्य में राजा कृष्णदेव राय हुआ करते थे. तेनालीराम उनके दरबार के कवि थे और वे अपनी समझ-बूझ और हास-परिहास के लिए प्रसिद्ध थे. उनकी खासियत थी कि गम्भीर से गम्भीर विषय को भी वह हंसते-हंसते हल कर देते थे. विजयनगर के राजा के पास नौकरी पाने के लिए उन्हें बहुत संघर्ष करना पड़ा. कई बार उन्हें और उनके परिवार को भूखा भी रहना पड़ा, पर उन्होंने हार नहीं मानी और कृष्णदेव राय के पास नौकरी पा ही ली. तेनालीराम की गिनती राजा कृष्णदेव राय के आठ दिग्गजों में होती थी.

सबसे लंबी और सबसे छोटी उम्र वाले जीव कौन हैं?
जापानी मछली कोई 250 साल तक, विशाल कछुआ (जाइंट टर्टल) पौने दो सौ से दो सौ साल तक, ह्वेल मछली दो सौ साल तक जीती है. मे फ्लाई नाम की मक्खी की उम्र 24 घंटे होती है. इसी तरह जल में रहने वाले एक नन्हे प्राणी गैस्ट्रोटिच की उम्र होती है तीन दिन.

हमारे शरीर में कितना पानी होता है?
शरीर-विज्ञानी आर्थर गायटन की पाठ्य पुस्तक ‘मेडिकल फिज़ियॉलॉजी’ के अनुसार एक सामान्य व्यक्ति के शरीर के वजन का लगभग 57 फीसदी भाग पानी के रूप में होता है. इस हिसाब से 70 किलोग्राम वजन के व्यक्ति के शरीर में लगभग 40 लिटर पानी होता है. नवजात शिशु के शरीर में तो 75 फीसदी तक भार पानी का होता है. इसके बाद दस साल की उम्र तक यह पानी कम होता जाता है और ठोस पदार्थ बढ़ता जाता है. कुछ व्यक्तियों के शरीर में यह घटकर 45 फीसदी तक रह जाता है. शरीर के तरल पदार्थ का आकलन औसत में होता है, इसमें कम-ज्यादा भी हो सकता है.प्रभात खबर अवसर में प्रकाशित

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