Sunday, June 18, 2017

शंघाई सहयोग संगठन क्या है?

शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) राजनीतिक, आर्थिक और सुरक्षा सहयोग का संगठन है, जिसकी शुरुआत चीन और रूस के नेतृत्व में यूरेशियाई देशों ने की थी. अप्रैल 1996 में शंघाई में हुई एक बैठक में चीन, रूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान और ताजिकिस्तान आपस में एक-दूसरे के नस्ली और धार्मिक तनावों से निबटने के लिए सहयोग करने पर राज़ी हुए थे. इसे शंघाई फाइव कहा गया था. शंघाई फाइव के साथ उज्बेकिस्तान के आने के बाद जून 2001 में शंघाई सहयोग संगठन की स्थापना हुई. 2005 में कजाकिस्तान के अस्ताना में हुए सम्मेलन में भारत, ईरान, मंगोलिया और पाकिस्तान के प्रतिनिधियों ने पहली बार इसमें हिस्सा लिया. अब भारत और पाकिस्तान भी इस संगठन के सदस्य बन गए हैं. इस संगठन का मुख्य उद्देश्य मध्य एशिया में सुरक्षा चिंताओं के मद्देनज़र सहयोग बढ़ाना है. पश्चिमी मीडिया मानता है कि एससीओ का मुख्य उद्देश्य नेटो के बराबर खड़ा होना है. अमेरिका ने 2005 में इस संगठन में पर्यवेक्षक देश बनने के लिए आवेदन किया था, जिसे नकार दिया गया था.
मुस्लिम ब्रदरहुड क्या है?
हाल में सउदी अरब, मिस्र, बहरीन, यमन, लीबिया और संयुक्त अरब अमीरात ने कतर के साथ जब अपने राजनयिक संबंध तोड़े, तब आरोप लगाया कि कतर चरमपंथ फैलाने वाले इस्लामिक संगठनों की मदद कर रहा है. सउदी अरब की आधिकारिक प्रेस एजेंसी ने कतर पर आरोप लगाया था कि वह मुस्लिम ब्रदरहुड, इस्लामिक स्टेट और अल-कायदा को अपनाकर क्षेत्र में अस्थिरता पैदा कर रहा है. इस्लामिक स्टेट और अल-कायदा का नाम हमने हालांकि ज्यादा सुना है, पर द सोसाइटी ऑफ़ मुस्लिम ब्रदर्स या मुस्लिम ब्रदरहुड इन दोनों के मुकाबले ज्यादा पुराना संगठन है. यह कई अरब राष्ट्रों में सबसे बड़ा राजनीतिक प्रतिरोध संगठन है. इसकी स्थापना सन 1928 में एक इस्लामिक धर्म-शास्त्री हसन अल-बन्ना ने की थी. इसकी अनुमानित सदस्य संख्या 20 लाख है. जुलाई 2013 में मिस्र में मुहम्मद मुर्सी की सरकार के खिलाफ जनता सड़क पर उतर आई थी, जिसके बाद सेना ने उन्हें सत्ता से हटा दिया. मुर्सी के पीछे यही मुस्लिम ब्रदरहुड संगठन था, जिसे उसके बाद आतंकी संगठन घोषित कर दिया गया. इस संगठन का ध्येय वाक्य है, कुरान ही हमारा संविधान है.
सलीम-अनारकली की कहानी क्या सच्ची है?
सलीम-अनारकली की कहानी इतिहास सम्मत नहीं है. न तो अकबरनामा में और न तुजुक-ए-जहाँगीरी में इसका जिक्र है. अगस्त 1608 में भारत आए एक अंग्रेज पर्यटक-व्यापारी विलियम फिंच ने एक पत्रिका में प्रकाशित अपने संस्मरणों में अनारकली की कहानी का जिक्र किया था. दंतकथा के रूप से यह कहानी एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी के बीच चलती रही. उर्दू के लेखक अब्दुल हलीम शरर ने सम्भवतः इस विषय पर पहली साहित्यिक रचना लिखी थी. उन्होंने अपनी किताब के शुरू में ही लिखा कि यह रचना पूरी तरह काल्पनिक है.  अलबत्ता यह कहानी इतनी लोकप्रिय है कि लोग उसे ऐतिहासिक मानते हैं. मान्यता है कि अनारकली पंजाब में लाहौर के आसपास की रहने वाली थी. लाहौर में अनारकली की एक मज़ार भी है. अनारकली की इस कब्र पर दो तारीख अंकित है, जिसमें से एक हैं 1008 हिजरी (1599 ई.), और दूसरी है 1025 हिजरी (1615 ई.)। पहली तारीख अनारकली की मौत की है और दूसरी मकबरे का काम पूरा होने की तारीख है। अकबर का निधन 1605 में हुआ था और जहाँगीर यानी सलीम का 1627 में। तारीखें उसी दौर की ओर इशारा करती है.
क्या सफेद हाथी भी होते हैं?
दक्षिण पूर्व एशिया के थाईलैंड, म्यांमार, लाओस और कम्बोडिया आदि में सफेद हाथी भी मिलते हैं. इनकी संख्या कम होने के कारण इन्हें महत्वपूर्ण माना जाता है. राजा महाराजा ही इन्हें रखते हैं. हिन्दू परम्परा में सफेद हाथी ऐरावत है इन्द्र की सवारी. पवित्र होने के नाते इस इलाके में सफेद हाथियों से काम भी नहीं कराते. हाथी रखना खर्चीला काम है, इसलिए सफेद हाथी मुहावरा बन गया है.
क्या जानवर कलर ब्लाइंड होते हैं?
जो देखता है उसे कोई न कोई रंग तो दीखता ही है. कलर ब्लाइंड का मतलब है सारी चीजें एक या दो रंगों में नजर आना. चमगादड़ को ध्वनि की तरंगे बेहतर तरीके से समझ आती है. पर वे कलर ब्लाइंड होते हैं. बंदरों में तीन रंग देखने की क्षमता होती है. इंसान एक करोड़ तक रंगों को अलग-अलग पहचान सकता है. कुछ पक्षियों में रंग देखने की बेहतरीन क्षमता होती है वे अल्ट्रा वॉयलेट रंग भी देख लेते हैं.
भारत की सीमा से जुड़े पड़ोसी मुल्क कितने हैं?
चीन, पाकिस्तान, अफ़ग़ानिस्तान (कश्मीर का वह हिस्सा जो पाकिस्तानी नियंत्रण में है), नेपाल, भूटान, म्यांमार, बांग्लादेश, श्रीलंका और मालदीव. श्रीलंका और मालदीव पड़ोसी हैं, जमीन से जुड़े नहीं हैं.
एमएमएस का फुलफॉर्म?
मल्टीमीडिया मैसेजिंग सर्विस.

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