Tuesday, May 22, 2018

मैराथन दौड़


मैराथन दुनिया में सबसे लम्बी दूरी की दौड़ है। आधिकारिक रूप से इसकी लम्बाई 42.195 किलोमीटर (26 मील 385 गज) होती है। यह सड़क पर होने वाली दौड़ है, जिसका छोटा सा हिस्सा ही स्टेडियम के भीतर होता है। सन 1896 में जब आधुनिक ओलिम्पिक खेल शुरू हुए तब मैराथन दौड़ भी उसका हिस्सा थी। पर उस वक्त इसकी लम्बाई का मानकीकरण नहीं हुआ था। इसकी लम्बाई का निर्धारण सन 1921 में हुआ।

दुनिया में आज 800 से ज्यादा ऐसी मैराथन प्रतियोगिताएं होती हैं, जो किसी न किसी रूप में खेल संघों से सम्बद्ध होती हैं। इन्हें स्वास्थ्य तथा अन्य सामाजिक जागरूकता कार्यक्रमों से भी जोड़ा जाता है। इनमें सैकड़ों और कई बार हजारों शौकिया धावक भी हिस्सा लेते हैं। तमाम लोग इस दौड़ के छोटे से हिस्से को ही पूरा करते हैं। कई जगह हाफ मैराथन भी होती हैं।

मैराथन दौड़ यूनान की एक दंतकथा से प्रेरित है। इसकी कहानी फ़ेडिप्पिडिस नामक यूनानी धावक से जुड़ी है। फ़ेडिप्पिडिस एक हरकारा था, जिसे मैराथन से एथेंस यह घोषित करने के लिए भेजा गया था कि मैराथन के युद्ध में (जिसमें वह खुद भी लड़ रहा था) फारसियों की पराजय हो गई है। यह ई.पू. 490 के अगस्त या सितंबर की घटना है। कहा जाता है कि फ़ेडिप्पिडिस पूरे रास्ते पर बिना रुके दौड़ा और फिर सभा में प्रवेश करके बोला नेनिकेकामेन (हम जीत गए)। और फिर वह गिर पड़ा और मर गया।

मैराथन से एथेंस की दौड़ का पहला वृत्तांत प्लूटार्क की एथेंस कीर्ति में मिलता है, जो पहली सदी में लिखी गई थी और हेराक्लाइडस पॉण्टिकस की लुप्त कृति को संदर्भित करते हुए धावक का नाम एर्चियस या यूक्लस का थेर्सिपस बताया गया था। एक और लेखक समोसाता के लूशियन (दूसरी सदी) ने भी इस कथा को लिखा है, पर धावक का नाम फ़ेलिप्पिडिस बताया है, फ़ेडिप्पिडिस नहीं। बहरहाल यह किंवदंती है। इसका ऐतिहासिक प्रमाण नहीं है। यूनानी-फ़ारसी युद्धों के प्रमुख स्रोत, यूनानी इतिहासकार हैरोडोटस ने फ़ेडिप्पिडिस को एक हरकारे के रूप में वर्णित किया है, जो मदद का संदेश लेकर एथेंस से स्पार्टा और वापस गया। एक तरफ से यह दूरी 240 किलोमीटर (150 मील) से भी ज़्यादा है।

डब्लूटीओ में कितने सदस्य हैं?
विश्व व्यापार संगठन में 164 सदस्य और 23 पर्यवेक्षक देश हैं। 14 जुलाई 2016 को लाइबेरिया इसका 163वाँ और 29 जुलाई 2016 को अफगानिस्तान इसका 164वाँ सदस्य बना।

कहाँ और कब बनी पहली कार?

हालांकि शुरू में भाप से चलने वाली गाड़ियाँ बनी थीं, पर इंटरनल कॉम्बुशन इंजन से चलने वाली पहली कार सन 1870 में ऑस्ट्रिया के वियना शहर में सिग्फ्राइड मार्कस ने तैयार की। वह गैसोलीन से चलती थी। इसे फर्स्ट मार्कस कार कहते हैं। मार्कस ने ही 1888 में सेकंड मार्कस कार तैयार की जिसमें कई तरह के सुधार किए गए थे। इस बीच जर्मनी के मैनहाइम में कार्ल बेंज ने सन 1885 में तैयार की।


1 comment:

  1. आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन जन्म दिवस - राजा राममोहन राय और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

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