Friday, May 25, 2018

इंजेक्शन कब शुरू हुए?


शरीर में चोट लगने पर दवाई सीधे लगाने की परम्परा काफी पुरानी है. शरीर में अफीम रगड़कर या किसी कटे हुए हिस्से में अफीम लगाकर शरीर को राहत मिल सकती है ऐसा विचार भी पन्द्रहवीं सोलहवीं सदी में था. अफीम से कई रोगों का इलाज किया जाने लगा, पर डॉक्टरों को लगता था कि इसे खिलाने से लत पड़ सकती है. इसलिए शरीर में प्रवेश का कोई दूसरा तरीका खोजा जाए. स्थानीय एनिस्थासिया के रूप में भी मॉर्फीन वगैरह का इस्तेमाल होने लगा था. ऐसी भीतर से खोखली सूई सोलहवीं-सत्रहवीं सदी से इस्तेमाल होने लगी थी. पर सबसे पहले सन 1851 में फ्रांसीसी वैज्ञानिक चार्ल्स गैब्रियल प्रावाज़ ने हाइपोडर्मिक नीडल और सीरिंज का आविष्कार किया. इसमें महीन सुई और सिरिंज होती थी. तबसे इसमें तमाम तरह के सुधार हो चुके हैं. 

आसमान ठोस है, तरल या गैस है?

आप जिस आसमान को देखते हैं वह बाहरी अंतरिक्ष का एक हिस्सा है. धरती से दिन में यह नीले रंग का नजर आता है. इसकी वजह है हमारा वातावरण जिससे टकराकर सूरज की किरणों का नीला रंग फैल जाता है. पर यह आसमान धरती से देखने पर ही नीला लगता है. किसी अन्य ग्रह से देखने पर ऐसा ही नहीं दिखेगा, बल्कि आमतौर पर काला नजर आएगा. यह ठोस नहीं है, पर इसमें ठोस, तरल और गैसीय पदार्थ प्रचुर मात्रा में मौजूद हैं. यह अनंत है. दुनिया के बड़े से बड़े टेलिस्कोप से भी आप इसका बहुत छोटा हिस्सा देख पाएंगे.

हार्ड वॉटर को सॉफ्ट कैसे बनाते हैं?

सबसे आसान तरीका पानी को उबाल कर डिस्टिलेशन का है. पर वह रोजमर्रा के लिहाज से महंगा होगा. आमतौर पर हम रिवर्स ऑस्मॉसिस के जरिए पानी को पीने लायक बनाते हैं, जिसे छोटे नाम आरओ से ज्यादा पहचाना जाता है. इसमें एक मैम्ब्रेन या झिल्ली के मार्फत पानी के हार्ड तत्व को अलग किया जाता है. दुनिया की सबसे बड़ी डिसैलिनेशन प्रोजेक्ट संयुक्त अरब अमीरात में लगा रस अल-खैर संयंत्र है, जो खारे पानी से हर रोज 10,25,000 घन मीटर मीठा पानी तैयार करती है. अलबत्ता कुवैत ऐसा देश है, जो अपने नागरिकों को शत-प्रतिशत मीठा पानी सप्लाई करता है. 














1 comment:

  1. आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन रास बिहारी बोस और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

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