Tuesday, July 24, 2018

सीरिया में लड़ाई क्यों?

सीरिया में राष्ट्रपति बशर अल-असद के ख़िलाफ़ पिछले सात साल से विद्रोह चल रहा है, जिसका इसरायल, सउदी अरब, तुर्की, अमेरिका और पश्चिमी देश अपने-अपने तरीके से समर्थन कर रहे हैं। दूसरी तरफ बशर-अल-असद की सरकार को ईरान और रूस का समर्थन प्राप्त है। यह बगावत गृहयुद्ध में तब्दील हो चुकी है। इसमें अब तक 3 लाख से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं। बशर अल-असद ने 2000 में अपने पिता हाफेज़ अल असद की जगह ली थी।सन 2011 में कई अरब देशों में सत्ता के ख़िलाफ़ शुरू हुई बगावत से प्रेरित होकर मार्च 2011 में सीरिया के दक्षिणी शहर दाराआ में भी लोकतंत्र के समर्थन में आंदोलन शुरू हुआ था, जिसने गृहयुद्ध का रूप ले लिया है।
सुन्नी बहुल सीरिया में राष्ट्रपति बशर अल-असद शिया हैं।यह संघर्ष साम्प्रदायिक रूप ले चुका है, जिसमें जेहादी ग्रुपों को पनपने का मौका मिला। इसी दौरान इराक में इस्लामिक स्टेट उभार शुरू हुआ, जिसने उत्तरी और पूर्वी सीरिया के काफी हिस्सों पर क़ब्ज़ा कर लिया। दूसरी तरफ ईरान, लेबनान, इराक़, अफ़गानिस्तान और यमन से हज़ारों की संख्या में शिया लड़ाके सीरिया की सेना की तरफ़ से लड़ने के लिए पहुंचे हैं। सीरिया, इराक और तुर्की की सीमा पर बड़ी संख्या में कुर्दों की आबादी भी है। वे एक स्वतंत्र देश बनाने के लिए अलग लड़ रहे हैं।
इस प्रकार इस इलाके में कई तरह की ताकतें, कई तरह की ताकतों से लड़ रहीं हैं। पश्चिमी देशों का आरोप है कि सीरिया की सेना विद्रोहियों का दमन करने के लिए रासायनिक हथियारों का इस्तेमाल कर रही है। सीरिया पर पश्चिमी देशों के नवीनतम हमलों की वजह यह बताई जा रही है कि गत 7 अप्रैल को पूर्वी गोता इलाके के डूमा में सीरिया की सेना ने विद्रोहियों और राहत-कर्मियों पर रासायनिक हथियारों से हमला किया, जिसमें 40 लोग मारे गए।

नॉटिकल मील क्या होता है?
नॉटिकल मील का इस्तेमाल आमतौर पर समुद्री और हवाई नेवीगेशन में होता है। लम्बाई के हिसाब से यह करीब 1852 मीटर या 6076 फुट होता है। सागर और आकाश के नेवीगेशन में आमतौर पर अक्षांश-देशांतर का इस्तेमाल होता है।भूमध्य रेखा और उससे उत्तर या दक्षिण में इसकी दूरी में मामूली फर्क भी आता रहता है। 

दुनिया का सबसे महँगा पदार्थ क्या है? 
दुनिया का सबसे महँगा पदार्थ एंटीमैटर है, बशर्ते उसे हम हासिल कर सकें। एंटीमैटर पदार्थ के प्रतिकणों से बना होता है। मसलन पॉज़िट्रॉन, प्रति प्रोट्रॉन, प्रति न्यूट्रॉन वगैरह। आपको हैरानी होगी कि एक ग्राम एंटी मैटर से 100 छोटे-छोटे देशों को खरीदा जा सकता है। इसकी खोज बीसवीं सदी के पूर्वार्ध में हुई थी। एक अनुमान है कि एक ग्राम एंटीमैटर की कीमत 31 लाख 25 हजार करोड़ रुपये के आसपास होगी। एक मिलीग्राम एंटीमैटर बनाने में तकरीबन 160 करोड़ रुपये लगते हैं। जहाँ यह बनता है, वहाँ सुरक्षा का मजबूत घेरा होता है। नासा में जहाँ इसका निर्माण होता है, बहुत कम लोगों को जाने की इजाजत होती है। एंटीमैटर का इस्तेमाल दूसरे ग्रहों में जाने वाले वाहनों के ईँधन के रूप में हो सकता है। हालांकि पृथ्वी पर एंटीमैटर की आवश्यकता नहीं होती, पर वैज्ञानिकों ने बहुत थोड़ी मात्रा में एंटीमैटर का निर्माण किया है। प्राकृतिक रूप से पृथ्वी पर यह अंतरिक्ष तरंगों के साथ वातावरण में आ जाने से या रेडियोधर्मी पदार्थ के ब्रेकडाउन से अस्तित्व में आता है। 
राजस्थान पत्रिका के नॉलेज कॉर्नर में प्रकाशित

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