Saturday, November 29, 2025

भारत में प्रशासनिक सेवाएँ

 

प्रशासनिक सेवा के अलावा पुलिस और विदेश सेवा को इसमें शामिल करते हैं। आज इसका काफी विस्तार हो चुका है। भारत में 1857 की लड़ाई के बाद ईस्ट इंडिया कंपनी के स्थान पर अंग्रेजी सरकार का शासन स्थापित हुआ। गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट 1858 के तहत नागरिक सेवाओं के लिए नियुक्ति के नियम भी बने। इस सेवा को इंपीरियल सिविल सर्विस और बाद में इंडियन सिविल सर्विस का नाम दिया गया। शुरुआत में उनकी भरती की परीक्षाएँ लंदन में होती थीं। बाद में भारत में भी होने लगीं। 1923 में भारतीय प्रशासनिक सेवा में स्थानीय भागीदारी के लिए आयोग बनाया गया, जिसके अध्यक्ष थे लॉर्ड ली ऑफ फेयरहैम। इसके पहले इंस्लिंगटन कमीशन और मोंटेग्यू-चेम्सफोर्ड आयोग ने भी भारतीयों की भागीदारी की सिफारिशें की थीं। ली आयोग ने 40 फीसदी स्थान ब्रिटिश, 40 फीसदी भारतीय सीधे और 20 फीसदी प्रादेशिक सेवाओं से प्रोन्नति देकर अफसरों को देने का सुझाव दिया। भरती के लिए लोक सेवा आयोग बनाने की सिफारिश भी की। इसके बाद 1926 में संघ लोकसेवा आयोग की स्थापना हुई। स्वतंत्रता के बाद संविधान सभा ने अनुच्छेद 315 के तहत इसे एक स्वायत्त संस्था के रूप में संविधान में स्थान दिया।

राजस्थान पत्रिका के नॉलेज कॉर्नर में 29 नवंबर, 2025 को प्रकाशित

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