Sunday, December 27, 2015

आईसिस, आईसिल, आईएस? खुद को ‘इस्लामिक स्टेट’ कहने वाले आतंकी संगठन का सही नाम क्या है?

पहले इस संगठन की पृष्ठभूमि को समझना चाहिए। इसकी शुरूआत सन 1999 में जॉर्डन के अबू मुसाब अल-ज़रकाबी ने ‘जमात अल-तौहीद-वल-जिहाद’ नाम से की थी। सन 2004 में अल-ज़रकाबी ने ओसामा बिन लादेन के प्रति अपनी आस्था व्यक्त करते हुए अपने संगठन का नाम कर दिया ‘तंज़ीम क़ायदात-अल-जिहाद फ बिलाद अल-रफीदायन।’ अंग्रेजी में इसका संक्षेप में नाम हुआ ‘अल-क़ायदा इन इराक़ (एक्यूआई)।’ सन 2006 में ज़रकाबी। बावजूद इसके उसका संगठन कायम रहा जिसके कब्जे में इराक का काफी इलाका था।

सन 2013 में इस संगठन ने सीरिया के कुछ इलाकों पर कब्जा करने के बाद अपने संगठन का नाम रखा ‘इस्लामिक स्टेट इन इराक एंड अल-शाम।’ अरबी भाषा में सीरिया को शाम कहा जाता है। हालांकि ‘अल शाम’ काफी पुराना शब्द है जो सीरिया, लेबनान, इस्रायल, फलस्तीन और जॉर्डन को एक साथ संबोधित करता है। भूमध्य सागर के जिस इलाके को अरबी में अल-शाम कहा जाता है, उसे अंग्रेजी में लैवेंट पुकारा जाता है। यहीं से एक नया अनुवाद हुआ और संगठन को ‘इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड लैवेंट’ यानी आईसिल कहा जाने लगा। इसके समांतर दूसरा शब्द चल रहा था ‘इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया’ यानी आईसिस।

जून 2014 में इस ग्रुप के नेता अबू बक्र अल बग़दादी ने इस्लामिक ‘खिलाफत’ के गठन की घोषणा कर दी, जिसका खलीफा खुद को घोषित कर दिया। इसके साथ ही इस संगठन ने घोषणा की कि वह अपने नाम के आगे से इराक और सीरिया हटा रहा है। संगठन का दावा है कि वह इस्लामिक खिलाफत स्थापित कर चुका है। इस तर्क से दुनिया की सभी इस्लामी सरकारें नाजायज हैं और केवल आईएस ही सही है।

पर एक नाम दाएश या दाइश भी चल रहा है? वह क्यों?
‘इस्लामिक स्टेट ऑफ इराक एंड सीरिया’ यानी आईसिस का अरबी अनुवाद है ‘अल-दावला अल-इस्लामिया फ इराक वा अल शाम।’ अरबी मीडिया आईएस को इस नाम से पुकारता है। इसका संक्षेप नाम बना दाएश। पश्चिमी देशों ने इसे एक शब्द बना कर दाएश के रूप में इस्तेमाल करने का फैसला किया है। हालांकि अरबी में दाएश जैसा कोई शब्द नहीं है। ब्रिटिश प्रधानमंत्री डेविड केमरन, फ्रांसीसी राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलां, ऑस्ट्रेलियन प्रधानमंत्री टोनी एबट और अब अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने भी इसे दाएश कहना शुरू कर दिया है।

पश्चिमी देशों के नेता दाएश नाम को वरीयता क्यों दे रहे हैं?


ऐसा केवल राजनीतिक और वैचारिक कारणों से किया जा रहा है। इस्लामिक स्टेट कहने से इस संगठन को वैधानिकता मिलती है। यानी कोई राज्य स्थापित हो गया है। प्रकारांतर से इसका मतलब यह हुआ कि ‘खिलाफत’ की स्थापना हो गई है, जिसके आगे सभी मुसलिम देशों को झुकना होगा, जबकि ऐसा है नहीं। उसके नाम रखने लेने मात्र से तो कोई नहीं बन जाता। इससे उसका रुतबा बढ़ता है और दुनिया के उन मुसलमानों तक गलत संदेश जाता है, जो मानते हैं कि यह हत्यारों का गिरोह है। यह संगठन दाएश शब्द को नापसंद करता है। यह शब्द रबी के शब्द ‘दाहेश’ से मिलता-जुलता है, जिसका अर्थ है समाज में द्वेष पैदा करने वाला। अब ज्यादातर अरब देश भी इस संगठन को दाएश नाम से पुकारने लगे हैं।

फिर भी सबसे ज्यादा प्रचलित नाम क्या है?


ज्यादातर मीडिया हाउस इस इस्लामिक स्टेट ही लिख रहे हैं, जो नाम संगठन खुद बता रहा है। गूगल पर आधारित ज्यादातर डेटा का निष्कर्ष है कि गैर अरब इलाकों में यह नाम ही सबसे ज्यादा प्रचलित है। इस साल अक्तूबर तक दाएश नाम का इस्तेमाल जीरो के आसपास था। नवम्बर में पेरिस हमले के बाद कुछ समय यह नाम प्रचलन में रहा, पर अब फिर से इस्लामिक स्टेट नाम ही ज्यादा प्रचलन में है।
  
राजस्थान पत्रिका के नॉलेज कॉर्नर में प्रकाशित

Friday, December 25, 2015

विश्व में कुल कितने देश हैं?

संयुक्त राष्ट्र की सूची में 206 देशों को तीन वर्गों में बाँटा गया है. इनमें से 193 संयुक्त राष्ट्र-सदस्य हैं. दो पर्यवेक्षक देश हैं और 11 अन्य देश हैं. सम्प्रभुता के लिहाज से देखें तो 190 देश ऐसे हैं, जिनकी सम्प्रभुता को लेकर कोई संदेह नहीं है. सोलह देशों की सम्प्रभुता को लेकर विवाद है. वैटिकन सिटी को सम्प्रभुता सम्पन्न राज्य की मान्य परिभाषाओं में रखा जा सकता है, पर वह संयुक्त राष्ट्र का सदस्य नहीं केवल स्थायी पर्यवेक्षक है. उसके अलावा फलस्तीन भी पर्यवेक्षक देश है. संयुक्त राष्ट्र के 193 सदस्य देशों के अलावा कुछ राज-व्यवस्थाएं और हैं, जिन्हें पूर्ण देश नहीं कहा जा सकता. उनके नाम हैं अबखाजिया, कोसोवो, नागोर्नो–कारबाख, उत्तरी सायप्रस, सहरावी गणराज्य, सोमाली लैंड, दक्षिण ओसेतिया, ताइवान, और ट्रांसनिस्ट्रिया. ये देश किसी न किसी वजह से राष्ट्रसंघ के पूर्ण सदस्य नहीं हैं. चार साल पहले अफ्रीका में एक नए देश का जन्म हुआ है, जिसका नाम है दक्षिणी सूडान. लम्बे अर्से से गृहयुद्ध के शिकार सूडान में जनवरी 2011 में एक जनमत संग्रह हुआ, जिसमें जनता ने नया देश बनाने का निश्चय किया है. यह फैसला देश के सभी पक्षों ने मिलकर किया है. नए देश ने 9 जुलाई 2011 को औपचारिक रूप से जन्म लिया. यह भी संयुक्त राष्ट्र सदस्य है.

दुनिया की सबसे कम जनसंख्या वाले देश का नाम क्या है? 

प्रशांत महासागर में पिटकेयरन सम्भवतः दुनिया की सबसे छोटी आबादी वाला देश है. सन 2013 का अनुमान है कि वहाँ 56 लोग रहते हैं, जो मूल रूप से चार परिवारों के सदस्य है. यह देश ब्रिटिश ओवरसीज़ टैरीटरी है, पर इसकी अपनी संसदीय व्यवस्था है. इस लिहाज से यह दुनिया का सबसे छोटा लोकतंत्र है. तोकेलाओ 1100 और नियू 1500. तुवालू और नाउरू 10,000. वैटिकन सिटी की आबादी करीब 500 है.

भारत को English में Bharat क्यों नहीं लिखा जाता जबकि लगभग सभी देशों का नाम हिंदी और इंग्लिश में एक जैसा होता है.

भारतीय संविधान का पहला अनुच्छेद कहता है कि ‘भारत अर्थात इंडिया, राज्यों का संघ’ होगा. संविधान के अंग्रेजी पाठ में लिखा है India, that is Bharat, shall be a Union of States. इसका मतलब है कि भारत के दो आधिकारिक नाम हैं. अंग्रेजी में भारत लिखने में भी कोई हर्ज नहीं है और हिन्दी में इंडिया लिखने पर भी.

पोलर लाइट्स क्या है और इनका रहस्य क्या है?

ध्रुवीय ज्योति (अंग्रेजी: Aurora), या मेरुज्योति, वह चमक है जो ध्रुव क्षेत्रों के वायुमंडल के ऊपरी भाग में दिखाई पड़ती है. उत्तरी अक्षांशों की ध्रुवीय ज्योति को सुमेरु ज्योति (अंग्रेजी: aurora borealis), या उत्तर ध्रुवीय ज्योति, तथा दक्षिणी अक्षांशों की ध्रुवीय ज्योति को कुमेरु ज्योति (अंग्रेजी: aurora australis), या दक्षिण ध्रुवीय ज्योति, कहते हैं. यह रोशनी वायुमंडल के ऊपरी हिस्से थर्मोस्फीयर ऊर्जा से चार्ज्ड कणों के टकराव के कारण पैदा होती है. ये कण मैग्नेटोस्फीयर, सौर पवन से तैयार होते हैं. धरती का चुम्बकीय घेरा इन्हें वायुमंडल में भेजता है. ज्यादातर ज्योति धरती के चुम्बकीय ध्रुव के 10 से 20 डिग्री के बैंड पर होती हैं. इसे ऑरल ज़ोन कहते हैं. इन ज्योतियों का भी वर्गीकरण कई तरह से किया जाता है.

मानव शरीर की सबसे छोटी हड्डी का नाम क्या है?

मानव शरीर की सबसे छोटी हड्डी स्टेप्स है, जो कि कान में होती है. उसकी लंबाई 2.5 मिलीमीटर होती है. सबसे लम्बी हड्डी फीमर बोन यानी जाँघ की हड्डी होती है जो 19-20 इंच तक होती है.

हाई वोल्टेज़ तारों पर पक्षी कैसे बैठे रहते हैं?

आपने देखा होगा कि पक्षी एक तार पर बैठते हैं. जब वे तार पर बैठे होते हैं करंट उनके शरीर से प्रवाहित नहीं होता. यह प्रवाह या सर्किट पूरा नहीं होता. यह प्रवाह तभी पूरा होगा जब वे दूसरे तार को छुएं या धरती के किसी स्रोत के सम्पर्क में आएं. आपने देखा होगा कि कई बार बड़े पक्षी बिजली के तारों में फँस कर मर भी जाते हैं. अपने आकार के कारण वे दोनों तारों से छू जाते हैं.

प्रभात खबर अवसर में प्रकाशित

दिल्ली का इंडिया गेट क्यों और कब बनाया गया था?

नई दिल्ली के राजपथ पर स्थित 43 मीटर ऊँचा द्वार है वह भारत का राष्ट्रीय स्मारक है. यह सर एडविन लुटियन द्वारा डिजाइन किया गया था. इसकी बुनियाद ड्यूक ऑफ कनॉट ने 1921 में रखी थी और 1931 में तत्कालीन वायसरॉय लॉर्ड इरविन ने इसका उद्घाटन किया. मूल रूप से इस स्मारक का निर्माण उन 70,000 ब्रिटिश भारतीय सेना के सैनिकों की स्मृति में हुआ था जो प्रथम विश्वयुद्ध और अफ़ग़ान युद्धों में शहीद हुए थे. उनके नाम इस स्मारक में खुदे हुए हैं. यह स्मारक लाल और पीले बलुआ पत्थरों से बना हुआ है .

शुरु में इंडिया गेट के सामने अब खाली चंदवे के नीचे जॉर्ज पंचम की एक मूर्ति थी, लेकिन बाद में अन्य ब्रिटिश दौर की मूर्तियों के साथ इसे कॉरोनेशन पार्क में हटा दिया गया. भारत की स्वतंत्रता के बाद, इंडिया गेट पर भारतीय सेना के अज्ञात सैनिक का स्मारक मकबरे भी बनाया गया. इसे अमर जवान ज्योति के रूप में जाना जाता है. सन 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के शहीद सैनिकों की स्मृति में यहाँ एक राइफ़ल के ऊपर सैनिक की टोपी सजाई गई है जिसके चार कोनों पर सदैव अमर जवान ज्योति जलती रहती है. इसकी दीवारों पर हजारों शहीद सैनिकों के नाम खुदे हैं.

भारत में चंदन के पेड़ कहाँ पाए जाते हैं?


भारतीय चंदन का संसार में सर्वोच्च स्थान है. इसका आर्थिक महत्व भी है. यह पेड़ मुख्यत: कर्नाटक के जंगलों में मिलता है तथा देश के अन्य भागों में भी कहीं-कहीं पाया जाता है. भारत के 600 से लेकर 900 मीटर तक कुछ ऊँचे स्थल और मलयद्वीप इसके मूल स्थान हैं. वृक्ष की आयुवृद्धि के साथ ही साथ उसके तनों और जड़ों की लकड़ी में सुगंधित तेल का अंश भी बढ़ने लगता है. इसकी पूर्ण परिपक्वता में 60 से लेकर 80 वर्ष तक का समय लगता है. इसके लिए ढलवाँ जमीन, जल सोखने वाली उपजाऊ चिकनी मिट्टी तथा 500 से लेकर 625 मिमी. तक वार्षिक वर्षा की आवश्यकता होती है.

भारत में हीरे की खानें कहाँ है?

भारत में आंध्र प्रदेश के गोलकुंडा और तमिलनाडु के कोल्लूर तथा मध्य प्रदेश के पन्ना और बुंदर में हीरा खानें हैं. भारत के हीरे एक ज़माने में विश्व प्रसिद्ध थे. गोलकुंडा से 185 कैरेट का दरिया-ए नूर हीरा ईरान गया था. भारत के सबसे बड़े हीरे की बात करें तो नाम आता है ग्रेट मुगल का. गोलकुंडा की खान से 1650 में जब यह हीरा निकला तो इसका वजन 787 कैरेट था. कोहिनूर से करीब छह गुना भारी.

कहा जाता है कि कोहिनूर भी ग्रेट मुगल का ही एक अंश है. 1665 में फ्रांस के जवाहरात के व्यापारी ने इसे अपने समय का सबसे बड़ा रोजकट हीरा बताया था. यह हीरा आज कहां है किसी को पता नहीं. लंबे समय से गुमनाम भारतीय हीरों की सूची में आगरा डायमंड और अहमदाबाद डायमंड भी शामिल हैं. अहमदाबाद डायमंड को बाबर ने 1526 में पानीपत की लड़ाई के बाद ग्वालियर के राजा विक्रमजीत को हराकर हासिल किया था. तब 71 कैरेट के इस हीरे को दुनिया के 14 बेशकीमती हीरों में शुमार किया जाता था.

हल्की गुलाबी रंग की आभा वाले 32.2 कैरेट के आगरा डायमंड को हीरों की ग्रेडिंग करने वाले दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित संस्थान जेमोलॉजिकल इंस्टीट्यूट ऑफ अमेरिका ने वीएस-2 ग्रेड दिया है. द रीजेंट की कहानी भी कुछ ऐसी ही हैं. 1702 के आसपास यह हीरा गोलकुंडा की खान से निकला. तब इसका वजन 410 कैरेट था. मद्रास के तत्कालीन गवर्नर विलियम पिट के हाथों से होता हुआ द रीजेंट फ्रांसीसी क्रांति के बाद नेपोलियन के पास पहुंचा. नेपोलियन को यह हीरा इतना पसंद आया कि उसने इसे अपनी तलवार की मूठ में जड़वा दिया. अब 140 कैरेट का हो चुका यह हीरा पेरिस के लूव्र म्यूजियम में रखा गया है.

गुमनाम भारतीय हीरों की लिस्ट में अगला नाम है ब्रोलिटी ऑफ इंडिया. 90.8 कैरेट के ब्रोलिटी को कोहिनूर से भी पुराना बताया जाता है. 12वीं शताब्दी में फ्रांस की महारानी में इसे खरीदा. कई सालों तक गुमनाम रहने के बाद यह हीरा 1950 में सामने आया. जब न्यूयॉर्क के जूलर हेनरी विन्सटन ने इसे भारत के किसी राजा से खरीदा. आज यह हीरा यूरोप में कहीं है.

शादियों या पार्टियों के कार्ड में नीचे लिखा रहता है RSVP. इसका मतलब क्या है?

रेस्पांदे सी वु प्ले (Respondez Sil Vous Plait). इस फ्रेंच वाक्यांश में विनम्रता से पूछा गया है कृपया बताएं आ रहे हैं या नहीं.

विश्व की सबसे लम्बी कविता कौन सी है?

माना जाता है कि महाभारत दुनिया की सबसे लम्बी कविता है. इसमें एक लाख से ज्यादा श्लोक हैं और लगभग बीस लाख शब्द हैं. प्रसिद्ध ग्रीक महाकाव्य इलियाड और ओडिसी को एक साथ मिला लें तब भी महाभारत उनसे दस गुना बड़ा ग्रंथ साबित होगा.

फैट जीन क्या है?

ब्रिटिश वैज्ञानिकों ने ‘एफटीओ’ नामक विशेष कोशिका खोज निकाली है, जिसकी वजह से खासकर भारतीय मूल के लोगों में मोटापा, हृदयघात और मधुमेह जैसी बीमारियां देखने को मिलती हैं. इस खास जीन से यह भी जानकारी मिलेगी कि एक प्रकार की जीवनशैली के बावजूद कुछ लोगों का शरीर दुरुस्त रहता है, लेकिन कुछ मोटे हो जाते हैं. “जिनके शरीर में यह खास किस्म का जीन पाया जाता है, उन्हें अगर एक प्रकार का आहार दिया जाए, तो वह उन लोगों के मुकाबले अपना वजन बढ़ा हुआ महसूस करते है, जिनके शरीर में यह जीन नहीं होता है.”

मोटापे का अध्ययन कर रहे वैज्ञानिकों का कहना है कि शरीर में चर्बी बढ़ने के लिए जीन जिम्मेदार है. वैज्ञानिकों का यह भी दावा है कि इस जीन को खोज लिया गया है, जो कोशिकाओं में चर्बी जमा होने के लिए जिम्मेदार हैं. खोज से अनेक बीमारियों के उपचार और छुटकारा पाने की संभावना जताई गई है. फिट-1 व फिट-2 (फैट इंड्यूसिंग ट्रांसक्रिप्ट 1-2) नामक जीन की पहचान की है. इन दोनों जीनों में 50 प्रतिशत तक समानता है. इस विषय पर ताजा जानकारी यहाँ मिल सकती है http://www.usatoday.com/story/news/health/2015/08/19/obesity-gene/32026927/

Thursday, December 10, 2015

गिरगिट रंग कैसे बदलता है?

केवल गिरगिट की बात ही नहीं है, तमाम तरह के प्राणियों को प्रकृति ने आत्मरक्षा में अपने रंग-रूप को बदलने की सामर्थ्य दी है. गिरगिट जिस परिवेश में रहते हैं उनका रंग उसी से मिलता जुलता होता है ताकि वे दूर से नज़र न आएं. यह उनकी प्रणय शैली भी है, अपने साथी को आकर्षित करने के लिए वे रंग बदलते हैं. उनकी ऊपरी त्वचा पारदर्शी होती है जिसके नीचे विशेष कोशिकाओं की परतें होती है जिन्हें क्रोमैटोफोर कहा जाता है. इनकी बाहरी परत में पीले और लाल सेलों की होती है. निचली छेद होते हैं, जिनसे गुज़रने वाली रोशनी नीले रंग की रचना करती है. ऊपरी रंगत पीली हो दोनों रंग मिलकर हरे हो जाते हैं. सबसे आखिरी परत मेलनोफोर से बनी होती है. इसमें मेलनिन नामक तत्व होता है. जब मेलनोफोर सेल सक्रिय होते हैं, तब गिरगिट नीले और पीले रंग के मिश्रण से हरा दिखाई देता है या नीले और लाल रंग का मिश्रण दिखाई देता है. जब गिरगिट गुस्से में होता है तो काले कण उभर आते हैं और गिरगिट गहरा भूरा  दिखाई देता है. तितलियों का भी रंग बदलता है, लेकिन वह हल्के से गहरे या फिर गहरे से हल्के रंगों में ही परिवर्तित होता है, जबकि गिरगिट के कई रंग होते हैं. इनके मस्तिष्क को जैसे ही खतरे का संदेश जाता है, इनका दिमाग उन कोशिकाओं को संकेत भेजता है और यह कोशिकाएं इसी के अनुरूप फैलने व सिकुड़ने लगती हैं और गिरगिट का रंग बदल जाता है.

ऑप्टिकल फाइबर क्या है? सूचना प्रौद्योगिकी में इसकी क्या भूमिका है?

ऑप्टिकल फाइबर इंसान के बाल जैसा महीन एक पारदर्शी फाइबर या धागा है, जो ग्लास(सिलिका) या प्लास्टिक से बनता है. इसका इस्तेमाल प्रकाश को एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाना होता है. इसे वैवगाइड या लाइट पाइप कह सकते हैं. फाइबर-ऑप्टिक संचारण एक प्रणाली है जिसमें सूचनाओं की जानकारी एक स्थान से दूसरे स्थान तक ऑप्टिकल फाइबर के माध्यम से प्रकाश बिन्दुओं के रूप में भेजी जाती हैं. यानी ताँबे या किसी सुचालक धातु के मार्फत सूचना भेजने के बजाय प्रकाश के माध्यम से सूचना भेजना. इन दिनों यह तकनीक फाइबर ऑप्टिक संचार में काम आ रही है. इसके माध्यम से काफी दूरी तक काफी हाई बैंडविड्थ में जानकारी भेजी जा सकती है. इसमें एक तो छीजन या लॉसेज़ कम हैं दूसरे इलेक्ट्रॉमैग्नेटिक व्यवधान नहीं होते. सिद्धांततः यह तकनीक उन्नीसवीं सदी से प्रचलन में है, पर 1970 के दशक में इसे व्यावसायिक रूप से विकसित किया गया. इसके लाभ को देखते हुए विकसित दुनिया में कोर नेटवर्क में ताँबे या अन्य धातुओं के तारों की जगह काफी हद तक ऑप्टिकल फाइबर ने ले ली है. सन 2000 के बाद से फाइबर ऑप्टिक-संचार की कीमतों में काफी गिरावट आई है. इस वक्त इस तकनीक की पाँचवीं पीढ़ी का विकास हो रहा है. आधुनिक फाइबर ऑप्टिक संचार प्रणालियों में आमतौर फाइबर शामिल एक ऑप्टिकल ट्रांसमिटर होता है जो ऑप्टिकल सिगनल को कन्वर्ट कर ऑप्टिकल फाइबर को भेजता है.

जहाज कैसे तैरते हैं? 

पहले तैरने या उतराने का सिद्धांत समझ लें. आर्किमीडीज़ का सिद्धांत है कि कोई वस्तु जब पानी में डाली जाती है तब उसके द्वारा हटाए गए जल का भार उस वस्तु के भार के बराबर होता है. और हटाए गए पानी की ताकत उसे वापस ऊपर की ओर उछालती है. इसलिए लोहे का एक टुकड़ा जब पानी में डाला जाता है तब उसके द्वारा हटाए गए पानी की ऊपर को लगने वाली शक्ति को छोटा आकार मिलता है. यदि इसी लोहे के टुकड़े की प्लेट बना दी जाती तो उसका आकार बड़ा हो जाता और वह पानी के नीचे से आनी वाली ताकत का फायदा उठा सकती थी. यही नाव या जहाज के पानी पर उतराने का सिद्धांत है. पानी के ऊपर चलने के लिए या तो पतवार की ज़रूरत होती है अन्यथा किसी घूमने वाली चरखी की. जहाज के इंजन यह काम करते हैं.

होटलों की स्टार रेटिंग कैसे तय होती है?

दुनिया में होटलों की रेटिंग तय करने की कोई आधिकारिक व्यवस्था नहीं है. अलबत्ता सन 1958 में मोबिल ट्रैवल गाइड ने अपने ढंग से होटलों की रेटिंग शुरू की. इस गाइड को अब फोर्ब्स ट्रैवल गाइड कहते हैं. यात्रियों को होटल में प्राप्त सुविधाओं को बताने के लिए स्टार रेटिंग की व्यवस्था शुरू की गई थी. धीरे-धीरे दुनिया में होटल स्टार्स यूनियन बन गईं. जैसे यूरोपियन होटलस्टार्स यूनियन यूरोपियन यूनियन के 24 देशों की 39 यूनियनों की संस्था है. बहरहाल इन संगठनों ने पाँच स्टार तक होटलों की व्यवस्थाओं को परिभाषित किया है. कुछ होटल पाँच के बाद सुपर लक्ज़री जैसे विशेषण जोड़ लेते हैं. दुबई के होटल अल बुर्ज को दुनिया का पहला सेवन स्टार होटल कहने लगे हैं. इसके पहले मिलान, इटली में सेवन स्टार्स गैलेरिया ने खुद को दुनिया का पहला सेवन स्टार होटल घोषित कर दिया था. यह विवाद का विषय है.

हनीमून पर जाने की शुरूआत कैसे हुई? 

अंग्रेजी शब्दों की वैबसाइट वर्ल्डवाइड वर्ड्स (http://www.worldwidewords.org) के अनुसार हनीमून शब्द का पहली बार इस्तेमाल 16वीं सदी में रिचर्ड ह्यूलोट ने किया था. जैसा कि इसका आधुनिक अर्थ है विवाह के बाद कुछ समय का अवकाश जो नव दम्पति बिताते हैं. इसमें हनी का अर्थ मधुरता से और मून का बदलते समय, एक पखवाड़े और प्रेम के प्रतीक से भी है. कुछ लोगों का कहना है कि इसका मूल 4000 साल पुराने बेबीलोन में है, जहाँ विवाहित जोड़ा विवाह के बाद एक खास तरह का शर्बत पीता था, जिसमें शहद होता था. बहरहाल ऐसा लगता है कि 18 वीं सदी तक यह शब्द बहुत ज्यादा प्रचलन में नहीं था. अलबत्ता एक रोचक बात यह है कि यूरोपीय समाज ने इसे भारत से सीखा. अठारहवीं-उन्नीसवीं सदी में अंग्रेजों ने भारत में देखा कि विवाह के बाद लड़का और लड़की अपने सम्बन्धियों के घर जाकर मिलते हैं. इससे दोनों का परिचय अपने नए सम्बन्धियों से होता है. उस परम्परा में पर्यटन का भाव नहीं था. यूरोप में उसे पर्यटन का रूप मिला.
प्रभात खबर में प्रकाशित



Friday, December 4, 2015

तेनालीराम कौन थे?

तेनाली रामकृष्ण, तेनाली रामलिंगम या तेनाली राम तमिल, तेलुगु और कन्नड़ लोककथाओं का एक पात्र है. सोलहवीं सदी में दक्षिण भारत के विजयनगर राज्य में राजा कृष्णदेव राय हुआ करते थे. तेनालीराम उनके दरबार के कवि थे और वे अपनी समझ-बूझ और हास-परिहास के लिए प्रसिद्ध थे. उनकी खासियत थी कि गम्भीर से गम्भीर विषय को भी वह हंसते-हंसते हल कर देते थे. विजयनगर के राजा के पास नौकरी पाने के लिए उन्हें बहुत संघर्ष करना पड़ा. कई बार उन्हें और उनके परिवार को भूखा भी रहना पड़ापर उन्होंने हार नहीं मानी और कृष्णदेव राय के पास नौकरी पा ही ली. तेनालीराम की गिनती राजा कृष्णदेव राय के आठ दिग्गजों में होती थी.

कुइज़ीन Cuisine का क्या मतलब होता है?
कुइज़ीन फ्रांसीसी शब्द है, जिसका अर्थ है खाना बनाने की कला. इसके लिए लैटिन शब्द है कोकरे. पर कुइज़ीन शब्द का इस्तेमाल किसी स्थान विशेष या किसी और तरह से विशेष भोजन के लिए किया जाता है. जैसे जापानी व्यंजन, बंगाली, दक्षिण भारतीय, गुजराती वगैरह. स्थानीय सामग्री का इस्तेमाल भी इसमें महत्वपूर्ण है.

भारत सोने की चिड़िया कब था? अब क्यों नहीं है?
ईसा से 300 से कुछ ज्यादा साल पहले भारत में चंद्रगुप्त मौर्य का शासन था. उनके शासन से लेकर उनके पौत्र सम्राट अशोक तक के समय को भारत का श्रेष्ठ समय कह सकते हैं. अपने समय में दुनिया के महानतम सम्राट हुए हैं. अशोक ने स्वतंत्रता, समता, न्याय पर आधारित सामाजिक व्यवस्था का निर्माण किया. उनके राज्य में ही भारत को सोने की चिड़िया कहा जाता था. नोबेल पुरस्कार विजेता डॉ. अमर्त्य सेन के अनुसार अशोक के समय में दुनिया की अर्थव्यवस्था में भारत की भागीदारी 35% थी. भारत की समृद्धि कमोबेश जारी रही और पंद्रहवीं शताब्दी मे विश्व की पूरी अर्थव्यवस्था का पाँचवाँ हिस्सा भारत मे था. देश में मौजूद 18 हजार टन से ज्यादा सोने का भंडार इस बात का सबूत है कि भारत आज भी सोने की चिड़िया है. पर अर्थव्यवस्था की ताकत के आधार पर अभी यह बात नहीं कही जा सकती.

दुनिया की सबसे महंगी करेंसी कौन सी है?
सबसे महंगी करेंसी कुवैत की दीनार है जिसका वर्तमान रेट 3.5 डॉलर के आसपास है. सबसे कम मूल्य की करेंसियों में ईरान की रियाल (प्रति डॉलर लगभग 25,000), सोमाली शिलिंग (22,000) और वियतनाम का डोंग (21,000) होगा. यह रेट बढ़ता-घटता रहता है.

विशेषाधिकार हनन नोटिस क्या है? क्या इसे कोर्ट में चैलेंज किया जा सकता है?
संसद के विशेषाधिकार हनन पर यह प्रस्ताव लाया जा सकता है. सामान्यतः संसद के नियमों को अदालतें विचार के लिए स्वीकार नहीं करतीं. पर यदि संविधान की व्याख्या का मसला हो तो सुप्रीम सकता कोर्ट विचार कर सकता है.
  
तेलंगाना इलाके को तेलंगाना क्यों कहते हैं ?
भारत के आंध्र प्रदेश राज्य का एक क्षेत्र है, जिसे एक नया राज्य बनाने का फैसला हुआ है. इस इलाके में मान्यता है कि इस इलाके में लिंग के रूप में शिव तीन पर्वतों पर प्रकट हुए. ये हैं कालेश्वरम, मल्लिकार्जुन और द्राक्षाराम. ये पर्वत इस इलाके की सीमा बनाते हैं और इसीलिए इसे त्रिलिंग देश कहा जाता है जो तेलंगाना हो गया है. तेलुगु शब्द की उत्पत्ति भी इसी त्रिलिंग से है. यह पराधीन भारत के हैदराबाद नामक राजवाडे के तेलुगु भाषी क्षेत्रों से मिलकर बना है. 'तेलंगाना' शब्द का अर्थ है- 'तेलुगु भाषियों की भूमि' . तेलुगु शब्द का मूल रूप संस्कृत में "त्रिलिंग" है. इसका तात्पर्य आंध्र प्रदेश के श्रीशैल के मल्लिकार्जुन लिंग, कालेश्वर और द्राक्षाराम के शिवलिंग से है. इन तीनों सीमाओं से घिरा देश त्रिलिंगदेश और यहाँ की भाषा त्रिलिंग (तेलुगु) कहलाई.

भारत से किन-किन लोगों को नोबल पुरस्कार मिले हैं?
नोबेल सम्मान पाने वाले भारत से सम्बद्ध व्यक्तियों के नाम इस प्रकार हैः-
1902 रोनाल्ड रॉस-चिकित्सा-भारत में जन्मे विदेशी
1907 रुडयार्ड किपलिंग-साहित्य-भारत में जन्मे विदेशी
1913 रवीन्द्रनाथ ठाकुर-साहित्य    -भारतीय नागरिक
1930 सीवी रामन-भौतिक विज्ञान-भारतीय नागरिक
1968 डॉ हरगोविन्द खुराना-चिकित्सा-भारत में जन्मे अमेरिकी नागरिक
1979 मदर टेरेसा-शांति पुरस्कार-विदेश में जन्मीं, भारत में निवास
1983 सुब्रह्मण्यन चंद्रशेखर-भौतिक विज्ञान-भारत में जन्मे अमेरिकी नागरिक
1989-दलाई लामा-शांति-भारत में निवासी विदेशी
1998 अमर्त्य सेन-अर्थशास्त्र-भारतीय नागरिक
2001 वीएस नाइपॉल-साहित्य-भारतीय मूल के ब्रिटिश नागरिक
2009 वेंकट रामन रामकृष्णन-रसायन शास्त्र-भारत में जन्मे अमेरिकी नागरिक
2014 कैलाश सत्यार्थी-शांति-भारतीय नागरिक

रामैया वस्तावैया का क्या मतलब होता है?
रामैया वस्तावैया का मतलब है राम या रामैया, क्या तुम आ रहे हो? तेलुगु के इन शब्दों का इस्तेमाल शैलेन्द्र और शंकर-जयकिशन ने किया और श्री 420 के मार्फत एक यादगार गीत बना दिया. कहते हैं कि कभी शैलेन्द्र ने अपनी हैदराबाद यात्रा के दौरान ये पंक्तियाँ सुनी थीं. उन्हें ये भा गईं और मौका लगने पर इन्हें इस गीत में पिरो दिया.

धरती पर सबसे लंबी उम्र और सबसे छोटी उम्र वाले जीव कौन हैं?
जापानी मछली कोई 250 साल तक, विशाल कछुआ (जाइंट टर्टल) पौने दो सौ से दो सौ साल तक, ह्वेल मछली दो सौ साल तक जीती है. मे फ्लाई नाम की मक्खी की उम्र 24 घंटे होती है. इसी तरह जल में रहने वाले एक नन्हें प्राणी गैस्ट्रोटिच की उम्र होती है तीन दिन. 
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Friday, November 27, 2015

मैग्सेसे पुरस्कार किसके नाम पर दिया जाता है?

रैमन मैग्सेसे पुरस्कार की स्थापना 1957 में हुई. इसका नामकरण फिलिपींस के राष्ट्रपति रैमन मैग्सेसे के नाम पर हुआ, जिनकी 1957 में एक विमान दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी. इनका नाम स्थानीय भाषा में मैगसायसाय है, जो हिन्दी में मैग्सेसे प्रचलित है. यह पुरस्कार प्रतिवर्ष मैग्सेसे जयंती पर 31 अगस्त को लोक सेवा, सामुदायिक सेवा, पत्रकारिता, साहित्य तथा सृजनात्मक कला और अंतर्राष्ट्रीय सूझबूझ के लिए प्रदान किया जाता है. यह पुरस्कार ग़ैर एशियायी संगठनों, संस्थानों को भी एशिया के हित में कार्य करने के लिए दिया जा सकता है. भारत के विनोबा भावे, मदर टेरेसा, सत्यजित रॉय, वर्गीज कुरियन, एमएस सुब्बुलक्ष्मी, एमएस स्वामीनाथन, चंडी प्रसाद भट्ट, बाबा आम्टे, अरुण शौरी, टीएन शेषन, महाश्वेता देवी, अरविन्द केजरीवाल, किरन बेदी, जेएम लिंग्दोह जैसे अनेक महत्वपूर्ण व्यक्तियों को मिल चुका है. 

हिन्दू पौराणिक मान्यताओं के अनुसार कृष्ण गुरु कौन थे?

कृष्ण ने मथुरा में गर्गिमुनी से गायत्री मन्त्र एवं संदीपन मुनि से वैदिक कला और विज्ञान सीखा. उनके तेजस्वी गुरु संदीपन ऋषि थे. श्रीकृष्ण ने कंस का वध करने के पश्चात मथुरा का समस्त राज्य अपने नाना उग्रसेन को सौंप दिया था. इसके बाद वासुदेव और देवकी ने कृष्ण को यज्ञोपवीत संस्कार के लिए संदीपन ऋषि के आश्रम में भेज दिया, जहाँ उन्होंने चौंसठ दिनों में चौंसठ कलाएँ सीखीं. संदीपन ऋषि के आश्रम में ही कृष्ण और सुदामा की भेंट हुई थी, जो बाद में अटूट मित्रता बन गई. संदीपन ऋषि द्वारा कृष्ण और बलराम ने अपनी शिक्षाएँ पूर्ण की थीं. आश्रम में कृष्ण-बलराम और सुदामा ने एक साथ वेद-पुराण का अध्ययन प्राप्त किया था. दीक्षा के उपरांत कृष्ण ने गुरुमाता को गुरु दक्षिणा देने की बात कही. इस पर गुरुमाता ने कृष्ण को अद्वितीय मान कर गुरु दक्षिणा में उनका पुत्र वापस माँगा, जो प्रभास क्षेत्र में जल में डूबकर मर गया था. गुरुमाता की आज्ञा का पालन करते हुए कृष्ण ने समुद्र में मौजूद शंखासुर नामक एक राक्षस का पेट चीरकर एक शंख निकाला, जिसे "पांचजन्य" कहा जाता है. इसके बाद वे यमराज के पास गए और संदीपन ऋषि का पुत्र वापस लाकर गुरुमाता को सौंप दिया.

जेट लैग क्या होता है?
जेट लैग एक मनो-शारीरिक दशा है, जो शरीर के सर्केडियन रिद्म में बदलाव आने के कारण पैदा होती है. इसे सर्केडियन रिद्म स्लीप डिसॉर्डर भी कहते हैं. इसका कारण लम्बी दूरी की हवाई यात्रा खासतौर से पूर्व से पश्चिम या पश्चिम से पूर्व एक टाइम ज़ोन से दूसरे टाइम ज़ोन की यात्रा होती है. अक्सर शुरुआत में नाइट शिफ्ट पर काम करने आए लोगों के साथ भी ऐसा होता है. आपका सामान्य जीवन एक खास समय के साथ जुड़ा होता है. जब उसमें मूलभूत बदलाव होता है तो शरीर कुछ समय के लिए सामंजस्य नहीं बैठा पाता. अक्सर दो-एक दिन में स्थिति सामान्य हो जाती है. इसमें सिर दर्द, चक्कर आना, उनींदा रहना, थकान जैसी स्थितियाँ पैदा हो जाती है.

स्थगन प्रस्ताव क्या होता है? संसद क्यों, और एक दिन में कितनी बार स्थगित हो सकती है?

हमारी संसद के दोनों सदनों के नियमों में सार्वजनिक महत्त्व के मामले बिना देरी किए उठाने की कई व्यवस्थाएं हैं, इनमें कार्य स्थगन प्रस्ताव भी है. इसके द्वारा लोक सभा के नियमित काम-काज को रोककर तत्काल महत्त्वपूर्ण मामले पर चर्चा कराई जा सकती है. इसके अलावा कई और तरीके हैं जैसे कि ध्यानाकर्षण, आपातकालीन चर्चाएं, विशेष उल्लेख, प्रस्‍ताव (मोशन), संकल्प, अविश्वास प्रस्‍ताव, निंदा प्रस्‍ताव वगैरह. अगला सवाल है कि दिन में कितनी बार सदन स्थगित हो सकता है? यह परिस्थितियों पर निर्भर करता है.

संसद की कार्यवाही में किसी भाषण के समय कुछ चीजें रिकॉर्ड से बाहर क्यों कर दी जाती है?

यह संसद का अधिकार है कि वह कुछ खास शब्दों, अभिव्यक्तियों, विचारों या घटनाओं को आधिकारिक दस्तावेजों में नहीं रखना चाहती तो उसे रिकार्ड से बाहर कर दे. इस अधिकार का इस्तेमाल सामान्यतः पीठासीन अधिकारी के माध्यम से होता है.

चेक बाउंस होने पर ज़ुर्माना क्यों लगता है? क्या यह फाइन हर बार एक सा रहता है?

आपका आशय बैंक के फाइन से है. यह शुल्क तो बैंक इसलिए लेता है, क्योंकि वह उसे क्लियरिंग तक भेजता है और उसपर धनराशि नहीं मिलता. यह राशि अलग-अलग बैंक अलग-अलग लेते हैं. यों बार-बार यह गलती होने पर बैंक आपकी चेकबुक सुविधा वापस ले सकते हैं और खाता बंद भी कर सकते हैं. चेक बाउंस होने के अनेक कारण हो सकते हैं. मसलन खाते में पैसा नहीं है, तारीख गलत लिख दी गई है, खातेदार के हस्ताक्षर नहीं मिलते वगैरह. अलबत्ता जिसने यह चेक दिया है उसकी जिम्मेदारी है कि भुगतान करे. यदि वह चेक में बताई गई राशि का भुगतान नहीं करता तो उसके खिलाफ नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट की धारा 138 के तहत मुकदमा दायर किया जा सकता है जिसपर उसे सजा या जुर्माना कुछ भी हो सकता है. 

Thursday, November 19, 2015

किसी दवा की एक्सपायरी डेट कैसे तय होती है?

किसी भी दवा की समय सीमा एक वैज्ञानिक पद्धति से तय की जाती है. इन दवाइयों को सामान्य से कठिन परिस्थितियों में रखा जाता है जैसे 75 आरएच से अधिक आर्द्रता या 40 डिग्री से अधिक तापमान. फिर हर महीने या हर हफ़्ते उनकी प्रभावशीलता की जांच की जाती है. इसी आधार पर यह तय किया जाता है कि अमुक दवा की समय सीमा डेढ़ साल हो, दो साल या तीन साल. जब दवा बाज़ार में आ जाती है तो फिर उसका अध्ययन किया जाता है और उसकी प्रभावशीलता के अनुसार ही उसकी समय सीमा बढ़ाई जाती है.
भारी पानी (हैवी वॉटर) क्या होता है?
भारी पानी भी पानी है, पर खास तरह का. पानी की रासायनिक संरचना हाइड्रोजन के दो और ऑक्सीजन के एक परमाणु के मिलने से होती है. इसे कहते हैं एच2ओ. पर भारी पानी को कहते हैं डी2ओ. इसमें डी है हाइड्रोजन का आइसोटोप (समस्थानिक) ड्यूडीरियम. हाइड्रोजन के तीन प्रकार के आइसोटोप होते हैं. एक, प्रोटीयम, जो सामान्य पानी में होता है. इसे लाइट हाइड्रोजन कहते हैं. दूसरा है ड्यूटीरियम, जिसे भारी हाइड्रोजन कहते हैं और तीसरा है टाइरियम. भारी पानी को ड्यूटीरियम ऑक्साइड के नाम से भी जाना जाता है. इसी तरह ऑक्सीजन के भी तीन प्रकार के समस्थानिक या आइसोटोप होते हैं. इनके मिलने से सोलह प्रकार के पानी बनते हैं. सामान्यत: हम जिस पानी का इस्तेमाल करते हैं, उसमें भी भारी पानी हो सकता है, पर उसकी मात्रा बहुत कम होती है. एक टन में तकरीबन डेढ़ सौ ग्राम. आम पानी और भारी पानी के भौतिक और रासायनिक गुणधर्मों में काफी समानता है, लेकिन नाभिकीय गुणधर्मों में काफी फर्क है. भारी पानी के गुणधर्म इसे नाभिकीय रिएक्टर में मंदक यानी कूलेंट के रूप में उपयोगी बनाते हैं. कूलेंट के रूप में हल्के पानी के अलावा बेरीलियम और भारी पानी का इस्तेमाल होता है. भारी पानी इनमें सबसे बेहतर है.

ऑल इंडिया रेडियो (आकाशवाणी) की ओपनिंग धुन किस संगीतकार ने बनाई और कब?
इस बारे में कई तरह की बातें हैं. कुछ लोगों की मान्यता है कि इसे ठाकुर बलवंत सिंह ने बनाया. कुछ मानते हैं कि पं रविशंकर ने इसकी रचना की और कुछ लोग वॉयलिन वादक वीजी जोग को इसका रचेता मानते हैं. सम्भव है इसमें इन सबका योगदान हो, पर इसकी रचना का श्रेय चेकोस्लोवाकिया के बोहीमिया इलाके के संगीतकार वॉल्टर कॉफमैन को जाता है. इसकी रचना तीस के दशक में हुई होगी. कम से कम 1936 से यह अस्तित्व में है. वॉल्टर कॉफमैन उस वक्त मुम्बई में ऑल इंडिया रेडियो के पश्चिमी संगीत विभाग में कम्पोज़र का काम कर रहे थे. इस धुन में तानपूरा, वायोला और वॉयलिन का इस्तेमाल हुआ है. वॉल्टर कॉफमैन को यूरोप की राजनीतिक स्थितियों के कारण घर से बाहर आना पड़ा. वे अंतत: अमेरिका में बसे, पर भारत में भी रहे और यहाँ के संगीत का उन्होंने अध्ययन किया. कहा जाता है कि उनके एक सोनाटा यानी बंदिश या रचना में यह धुन भी थी. कॉफमैन ने इसमें कुछ बदलाव भी किया. इस रचना में वॉयलिन ज़ुबिन मेहता के पिता मेहली मेहता ने बजाया है. कुछ लोगों का कहना है कि यह राग शिवरंजिनी में निबद्ध है.

पुनर्विचार याचिका क्या है?
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 137 और 145 के तहत अपीलीय अदालतों यानी हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के निर्णयों के बारे में कोई पक्ष पुनर्विचार याचिका दायर कर सकता है. यह याचिका अदालत के निर्णय के बाद तीस दिन के भीतर दाखिल की जानी चाहिए. पुनर्विचार याचिका खारिज होने के बाद भी वह पक्ष उपचार याचिका या क्यूरेटिव पैटीशन दाखिल कर सकता है.

भारतीय शिल्प की नागर शैली क्या है?
हिन्दू शिल्प शास्त्र में कई तरह के शिखरों का विवरण मिलता है. इनमें नागर, द्रविड़ और वेसर प्रमुख हैं. नागर शैली आर्यावर्त की प्रतिनिधि शैली है जिसका प्रसार हिमालय से लेकर विंध्य पर्वत माला तक देखा जा सकता है. वास्तुशास्त्र के अनुसार नागर शैली के मंदिरों की पहचान आधार से लेकर सर्वोच्च अंश तक इसका चतुष्कोण होना है.

क्या हम अदालत में अपने मुकदमे की जिरह खुद कर सकते हैं?
हाँ आप जिरह कर सकते हैं. वकील की व्यवस्था आप की सहायता के लिए है. सुप्रीम कोर्ट की व्यवस्था है कि आप केवल अपने मामले की जिरह कर सकते हैं, किसी दूसरे की नहीं. उसके लिए वकील करना ही होगा. हाल में बॉम्बे हाईकोर्ट ने अपने मामलों को अदालत के सामने रखने के लिए कुछ जरूरी निर्देश भी जारी किए हैं. यों जटिल मामलों में आपको वकील की जरूरत होगी. साथ ही आपको कानून और अदालती प्रक्रिया की समझ भी होनी चाहिए.

जेंडर स्टडीज़ क्या होती है?
जेंडर स्टडीज़ का सामान्य अर्थ लैंगिक मसलों का अध्ययन है. इसमें महिला और पुरुष दोनों का अध्ययन शामिल है, पर व्यावहारिक रूप से यह नारी विषयक अध्ययन है. इसमें कानून, राजनीति, साहित्य, समाज, संस्कृति, मनोविज्ञान, पारिवार जैसे तमाम मसले शामिल हैं. यह मल्टी डिसिप्लिनरी अध्ययन है.
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