Saturday, December 24, 2022

आइफ़िल टावर क्या है?

फ़्रांस की राजधानी पेरिस में कैम्प डि मार्स पर बनी मीनार है आइफ़िल टावर। लोहे की इस मीनार की ऊँचाई 986 फुट है। उसपर लगे टीवी एंटीना को भी जोड़ लिया जाए तो 1058 फ़ुट है। 1889 में जब यह बनकर तैयार हुई तो दुनिया की सबसे ऊंची इमारत थी। इसका निर्माण फ़्रांस की क्रान्ति की शताब्दी मनाने के लिए किया गया था।

बारह राशियाँ क्या हैं?

आमतौर पर हम अंतरिक्ष का अध्ययन करने के लिए हम एक काल्पनिक गोला मानकर चलते हैं, जो पृथ्वी केंद्रित है। इसे खगोल कहते हैं। पृथ्वी की भूमध्य रेखा और दोनों ध्रुवों के समांतर इस खगोल की भी मध्य रेखा और ध्रुव मानते हैं। इस खगोल में सूर्य का एक विचरण पथ है, जिसे सूरज का क्रांतिवृत्त या एक्लिप्टिक कहते हैं। पूरे साल में सूर्य इससे होकर गुजरता है। हालांकि अंतरिक्ष में हर वस्तु गतिमान है, पर यह गति इस प्रकार है कि हमें तमाम नक्षत्र स्थिर लगते हैं। इन्हें हमने अलग-अलग तारामंडलों के नाम दिए हैं। 

सूर्य के इस यात्रा पथ को एक काल्पनिक लकीर बनाकर देखें तो पता लगेगा कि पृथ्वी और सभी ग्रहों के चारों ओर नक्षत्रों की एक पेटी जैसी बन जाती है। इस पेटी को बारह बराबर भागों में बाँटने पर बारह राशियाँ बनतीं हैं, जो बारह तारा समूहों को भी व्यक्त करतीं हैं। इनके नाम हैं मेष, बृष, मिथुन, कर्क, सिंह, कन्या, तुला, वृश्चिक, धनु, मकर, कुम्भ और मीन। सूर्य की परिक्रमा करते हुए धरती और सारे ग्रह इन तारा समूहों से गुजरते हैं। सालभर में सूर्य इन बारह राशियों का दौरा करके फिर अपनी यात्रा शुरू करता है। अंतरिक्ष विज्ञानी इसके आधार पर निष्कर्ष नहीं निकालते। इसे केवल फलित ज्योतिष ही मानता है।   

बादल फटना क्या होता है?

बादल फटने का मतलब एक छोटे से इलाके में कुछ मिनटों के भीतर भारी बरसात होना है। मैदानी क्षेत्रों की अपेक्षा पहाड़ी क्षेत्रों में बादल ज्यादा फटते हैं। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, प्रति घंटा 100 मिलीमीटर (3.94 इंच) के बराबर या उससे ज्यादा बारिश होना बादल फटना है। इस दौरान जो बादल बनता है वह जमीन से 15 किलोमीटर की ऊंचाई तक जा सकता है। बादल फटने के दौरान कुछ मिनटों में 20 मिलीमीटर से ज्यादा बरसात हो सकती है। जब वातावरण में बहुत ज्यादा नमी हो और बादलों को आगे बढ़ने की जगह न मिले तब ऐसा होता है। भारी मात्रा के साथ क्यूम्यूलोनिम्बस या कपासी वर्षी बादल जब ऊपर उठते हैं और उन्हें आगे बढ़ने का रास्ता नहीं मिलता तो उनमें मौजूद पानी नीचे गिर जाता है। यह एक तरीके से पानी भरे बैलून की तरह पानी भरे बादलों का फटना है। इसकी दूसरी वजहें भी होती हैं। जैसे कि सर्द और गर्म हवाओं का टकराना। या पहाड़ रास्ते में आने की वजह से बादल का रुक जाना वगैरह।

 राजस्थान पत्रिका के नॉलेज कॉर्नर में 22 अक्तूबर, 2022 को प्रकाशित


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