Sunday, April 24, 2016

एलियन का कोई सटीक प्रमाण है या ये सिर्फ हवा-हवाई बातें हैं?

कोई वैज्ञानिक विश्वास के साथ नहीं कह सकता कि अंतरिक्ष में जीवन है। किसी के पास प्रमाण नहीं है। पर कार्ल सागां जैसे अमेरिकी वैज्ञानिक मानते रहे हैं कि अंतरिक्ष की विशालता और इनसान की जानकारी की सीमाओं को देखते हुए यह भी नहीं कहा जा सकता कि जीवन नहीं है। जीवन कहीं अंतरिक्ष में ही उपजा और करोड़ों साल पहले किसी तरह पृथ्वी पर उसके बीज गिरे और यहाँ वह विकसित हुआ। कार्ल सागां का अनुमान था कि हमारे पूरे सौर मंडल में बैक्टीरिया हैं। यह अनुमान ही है, किसी के पास बैक्टीरिया का नमूना नहीं है। आने वाले कुछ वर्षों में मंगल या चंद्रमा के नमूनों में बैक्टीरिया मिल जाएं तो आश्चर्य नहीं होना चाहिए।

साठ के दशक में जब इनसान ने अपने यान धरती की कक्षा में पहुँचा दिए तब आसमान की खिड़की को और खोलने का मौका मिला। अमेरिका और रूस की आपस में प्रतियोगिता चल रही थी, पर दोनों देशों के दो वैज्ञानिकों ने मिलकर एक काम किया। कार्ल सागां और रूसी वैज्ञानिक आयसिफ श्क्लोवस्की ने मिलकर एक किताब लिखी इंटेलिजेंट लाइफ इन युनीवर्स। उसके पहले 1961 में सर्च फॉर एक्स्ट्रा टेरेस्ट्रियल इंटेलिजेंस (सेटी) का पहला सम्मेलन हो चुका था। वैज्ञानिकों का निश्चय था कि दूर कोई है और समझदार भी है तो वह या तो हमें संकेत देगा या हमारा संकेत पकड़ेगा।

अमेरिका की मशहूर विज्ञान पत्रिका ‘न्यू साइंटिस्ट’ ने सितम्बर 2006 में 10 ऐसी बातें गिनाईं जो इशारा करती हैं कि खोज जारी रखें तो अंतरिक्ष में जीवन होने के पक्के सुबूत भी मिल जाएंगे, बल्कि जीवन भी मिल जाएगा। दुनिया के वैज्ञानिकों ने निश्चय किया कि हमें मिलकर बड़ा काम करना चाहिए। 1961 में पहला सेटी सम्मेलन हुआ। फ्रैंक ड्रेक इसके प्रमुख सूत्रधार थे। ‘सेटी’ का काम मूलत: संकेत पकड़ना है। अनेक रेडियो फ्रीक्वेंसी अंतरिक्ष से धरती पर प्रवेश करती हैं। अंतरिक्ष में चल रहे प्राकृतिक घटनाक्रम का संदेश इन्हीं रेडियो तरंगों के सहारे मिलता है। यह खोज जारी है।

मिट्टी के बर्तन में पानी ठंडा क्यों रहता है?
जब किसी तरल पदार्थ का तापमान बढ़ता है तो भाप बनती है। भाप के साथ तरल पदार्थ की ऊष्मा भी बाहर जाती है। इससे तरल पदार्थ का तापमान कम रहता है। मिट्टी के बर्तन में रखा पानी उस बर्तन में बने असंख्य छिद्रों के सहारे बाहर निकल कर बाहरी गर्मी में भाप बनकर उड़ जाता है और अंदर के पानी को ठंडा रखता है। बरसात में वातावरण में आर्द्रता ज्यादा होने के कारण भाप बनने की यह क्रिया धीमी पड़ जाती है, इसलिए बरसात में यह असर दिखाई नहीं पड़ता।

राजस्थान पत्रिका के नॉलेज कॉर्नर में प्रकाशित

1 comment:

  1. आपकी इस पोस्ट को आज की बुलेटिन विश्व मलेरिया दिवस और ब्लॉग बुलेटिन में शामिल किया गया है। कृपया एक बार आकर हमारा मान ज़रूर बढ़ाएं,,, सादर .... आभार।।

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