Friday, April 22, 2016

छुई-मुई के पौधे की पत्तियों को स्पर्श करने से वे पत्तियां आपस में सिकुड़ क्यों जाती हैं?

शैलेंद्र द्विवेदी, 32, कार्तिक चौकवराह माता गलीउज्जैन-456006 (म.प्र.)

लाजवंती को आमतौर पर छुई-मुई के नाम से जाना जाता है। इस पौधे का वानस्पतिक नाम मिमोसा प्यूडिका है। इस पौधे की पत्तियां अत्यंत संवेदनशील होती है। छुई-मुई की पत्तियां किसी बाहरी वस्तु के स्पर्श से मुरझाती हैं। ये पत्तियां कोई कीड़ालकड़ी यहां तक कि तेज हवा चलने और पानी की बूंदों के स्पर्श मात्र से ही मुरझा जाती है। आसपास ढोल बजाने से भी इसकी पत्तियाँ मुरझाने लगती है। यह संयुक्त पत्तियों वाला पौधा है। इसमे छोटी-छोटी पत्तियां या पर्णक होते हैं जिनको सामान्यतया पत्तियां ही समझा जाता है। ये छोटी-छोटी पत्तियां (पर्णक) मुख्य पत्ती के बीचों-बीच स्थित मध्य शिरा के दोनों तरफ लगी होती हैं। यह पौधा अपनी प्रतिक्रिया इन छोटी-छोटी पत्तियों को आपस में चिपका कर अथवा खोलकर व्यक्त करता है जिसे छुई-मुई का मुरझाना या शर्माना भी कहते हैं।

इसकी पत्तियाँ कई कोशिकाओं की बनी होती हैं। इनमें द्रव पदार्थ भरा रहता है। यह द्रव कोशिका की भित्ति को दृढ़ रखता है तथा पर्णवृन्त को खड़ा रखने में सहायक होता है। जब इन कोशिकाओं के द्रव का दाब कम ही जाता है तो पर्णवृन्त तथा पत्तियों की कोशिका को दृढ़ नहीं रख पाता। जैसे ही कोई व्यक्ति इसकी पत्तियों को छूता है एक संदेश पत्तियों और उनके आधार तक पहुँचता है। इससे पत्तियों के निचले भाग की कोशिकाओं में द्रव का दाब गिर जाता है जबकि ऊपरी भाग की कोशिका के दाब में कोई परिवर्तन नहीं होता हैअतः पत्तियाँ मुरझा जाती है।

देखा गया है कि इस पौधे में जहां पहले स्पर्श होता हैवहां की पत्तियां पहले बंद होती हैं।  इस गुण की वजह से छुई-मुई का पौधा पशुओं द्वारा चरने से बच जाता है क्योंकि पशु के किसी अंग के हल्के स्पर्श से ही पूरा पौधा मुरझा जाता है। इससे पशु पौधे को बेजान समझ कर आगे बढ़ जाता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि यह पौधा भी हमारी तरह रात को सोता है।

गेट वे ऑफ इंडिया व इंडिया गेट किसने बनवाए, इनका क्या इतिहास है?
ज्योत्सना छाजेड़ द्वारा: सुंदर लाल छाजेड़, डाकघर के पास, पुरानी लेन, पो.: गंगाशहर, जिला: बीकानेर-334401 (राज.)

इंडिया गेट दिल्ली में है और गेटवे ऑफ इंडिया मुंबई में। इंडिया गेट दिल्ली के राजपथ पर स्थित है। इसकी ऊँचाई 42 मीटर है। यह प्रथम विश्वयुद्ध और अफगान युद्ध में शहीद होने वाले भारतीय जवानों की याद में 1931 में तैयार किया गया था। इस पर इन जवानों के नाम भी उकेरे गए हैं। गेटवे ऑफ इंडिया मुंबई में समुद्र तट पर बना है। इसकी ऊँचाई 26 मीटर है जिसे ब्रिटेन के राजा जॉर्ज पंचम और रानी मैरी की भारत यात्रा की याद में बनाया गया था। इसकी बुनियाद 31 मार्च 1911 में रखी गई थी। इसके वास्तुविद् थे जॉर्ज विटेट। यह सन 1924 में बनकर तैयार हुआ था और आजादी के बाद अंतिम ब्रिटिश सेना इसी द्वार से होकर गई थी। यह संरचना पेरिस के आर्क डी ट्रायम्‍फ की प्रतिकृति है।

इंडिया गेट नई दिल्ली के राजपथ पर स्थित 43 मीटर ऊँचा द्वार है। इसे सर एडविन लुटियन ने डिजाइन किया था। इसकी बुनियाद ड्यूक ऑफ कनॉट ने 1921 में रखी थी और 1931 में तत्कालीन वायसरॉय लॉर्ड इरविन ने इसका उद्घाटन किया। मूल रूप से इस स्मारक का निर्माण उन 70,000 ब्रिटिश भारतीय सेना के सैनिकों की स्मृति में हुआ था जो प्रथम विश्वयुद्ध और अफ़ग़ान युद्धों में शहीद हुए थे। उनके नाम इस स्मारक में खुदे हुए हैं। यह स्मारक लाल और पीले बलुआ पत्थरों से बना हुआ है।

शुरु में इंडिया गेट के सामने अब खाली चंदवे के नीचे जॉर्ज पंचम की एक मूर्ति थी, लेकिन बाद में अन्य ब्रिटिश दौर की मूर्तियों के साथ इसे कॉरोनेशन पार्क में हटा दिया गया। भारत की स्वतंत्रता के बाद, इंडिया गेट पर भारतीय सेना के अज्ञात सैनिक का स्मारक मकबरे भी बनाया गया। इसे अमर जवान ज्योति के रूप में जाना जाता है। सन 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के शहीद सैनिकों की स्मृति में यहाँ एक राइफ़ल के ऊपर सैनिक की टोपी सजाई गई है जिसके चार कोनों पर सदैव अमर जवान ज्योति जलती रहती है। इसकी दीवारों पर हजारों शहीद सैनिकों के नाम खुदे हैं।

उत्पत्ति और व्युत्पत्ति में क्या अंतर है?
अभ्युदय शर्मा, डी-301, बिल्डिंग नं.:10, मंगल मूर्ति कॉम्प्लेक्स, मानखुर्द घाटकोपर लिंक रोड, मानखुर्द (पश्चिम) मुंबई-400043

सामान्यतः उत्पत्ति शब्द का मतलब है जन्म या पैदाइश। इसी अर्थ के कुछ दूसरे शब्द हैं उद्गम, जन्म, उद्भव, सृष्टि और आरंभ वगैरह। व्युत्पत्ति के अर्थ में उसकी रचना प्रक्रिया भी जुड़ जाती है। किसी पदार्थ आदि की विशिष्ट उत्पत्ति। किसी चीज का मूल उद्गमन या उत्पत्ति स्थान। आमतौर पर यह शब्दों की व्युत्पत्ति के अर्थ में ज्यादा इस्तेमाल होता है। शब्द व्युत्पत्ति माने शब्द का मूल। शब्द का विकास।

भाषा के शब्दों के इतिहास के अध्ययन को व्युत्पत्ति शास्त्र (etymology) कहते हैं। यह शब्द यूनानी भाषा के यथार्थ अर्थ में प्रयुक्त Etum तथा लेखा-जोखा के अर्थ में प्रयुक्त Logos के योग से बना है, जिसका आशय शब्द के इतिहास का वास्तविक अर्थ सम्पुष्ट करना है| इसमें विचार किया जाता है कि कोई शब्द उस भाषा में कब और कैसे प्रविष्ट हुआ किस स्रोत से अथवा कहाँ से आया उसके स्वरूप और अर्थ में समय के साथ कैसे बदलाव हुआ वगैरह। 



कादम्बिनी के अप्रेल 2016 अंक में प्रकाशित

1 comment:

  1. छुई-मुई के पौधे की बारे में बहुत अच्छी जानकारी प्रस्तुति हेतु धन्यवाद!

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