Friday, October 26, 2012

मक्का शहर में अब्राज अल बेयत टावर्स दुनिया की सबसे बड़ी इमारत है


दुनिया की सबसे बड़ी इमारत कौन सी है?-लता शर्मा, लक्ष्मीनगर, दिल्ली 
सऊदी अरब के मक्का शहर में अब्राज अल बेयत टावर्स दुनिया की सबसे बड़ी इमारत है जिसमें तकरीबन 15 लाख वर्गमीटर एरिया है। यह इमारत ऊँचाई के लिहाज से दुनिया की दूसरी सबसे ऊँची इमारत है। 601 मीटर या 1972 फुट है। दुनिया की सबसे ऊँची इमारत है दुबई की बुर्ज खलीफा जो 828 मीटर ऊँची है।


कम्प्यूटर की ईज़ाद किसने की और कब?-सीमा सिन्हा, फरीदाबाद
कम्पयूटर वस्तुतः ऐसी मशीन है, जिसे प्रोग्राम किया जा सके और जो दी गई गणितीय तथा तार्किक क्रियाओं को क्रम से अपने आप करने में समर्थ हो। मशीन से हिसाब किताब कई सदियों पहले से होता रहा है, पर हम आज बिजली से चलने वाले जिस कम्प्यूटर से परिचित हैं, वह बीसवीं सदी की देन है। तब से अब तक यह साइज़ में छोटा काम में काफी तेज़ होता चला गया है। पहले इलेक्ट्रॉनिक डिजिटल कम्प्यूटर ब्रिटेन और अमेरिका में 1940 और 1945 के बीच विकसित किए। वे एक बड़े कमरे के आकार के थे,जो की कई सौ आधुनिक पर्सनल कम्प्यूटरों के बराबर बिजली खाते थे और काम आज के मामूली कम्प्यूटर से भी कम करते थे। संगणक (पीसी) के बराबर शक्ति की खपत करते थे। आपका सवाल है इसे किसने और कब ईज़ाद किया। इसका जवाब देने के पहले यह समझना ज़रूरी है कि आपका आशय किस कम्प्यूटर से है। अलबत्ता सन 1837 में गणित के एक ब्रिटिश प्रोफेसर चार्ल्स बैबेज ने एक एनैलिटिकल एंजिन का आइडिया दिया, जो स्टीम एंजिन से चलता और जो पंचकार्ड का इस्तेमाल करके मिकैनिकल करघों का काम प्रोग्राम्ड करता। पैसे की कमी से और कुछ दूसरे कारणों से यह मशीन नहीं बनी, जबकि सिद्धांततः वह बन सकती थी। सन 1939 में अमेरिका की आयोवा स्टेट यूनिवर्सिटी में जॉन वी एटेनासॉफ और क्लिफर्ड बैरी ने मिलकर एटेनासॉफ-बैरी कम्प्यूटर (एबीसी), जिसे पहला इलेक्ट्रॉनिक डिजिटल कम्प्यूटर कह सकते हैं। फिर भी सन 1943 में अमेरिका में बने इलेक्ट्रॉनिक न्यूमैरिकल इंटीग्रेटर एंड कम्प्यूटर यानी एनियैक को पहला इलेक्ट्रॉनिक डिजिटल कम्प्यूटर कह सकते हैं। तबसे विकास होता जा रहा है।

हमारे दादा कहते थे कि मुम्बई शहर दहेज में आया था। क्या यह सच है?-अभिषेक वासवानी, रजिन्दर नगर
मुम्बई या बॉम्बे का माहिम वाला इलाका तकरीबन एक हजार साल पहले बस गया था। 1348 में मुस्लिम सेनाओं ने इस द्वीप को जीत लिया और यह गुजरात राज्य का हिस्सा बन गया। इसके बाद पुर्तगालियों ने सन 1507 में इस इलाके को जीतने की कोशिश की, पर वह सफल नहीं हुई। लेकिन 1534 में गुजरात के शासक सुल्तान बहादुरशाह ने यह द्वीप पुर्तग़ालियों को एक समझौते के तहत सौंप दिया। 1661 में इंग्लैंड के किंग चार्ल्स द्वितीय व पुर्तग़ाल के राजा की बहन कैथरीन आफ़ ब्रैगेंज़ा के विवाह के बाद यह एक तरह से पुर्तगालियों ने यह तोहफे के तौर पर अंग्रेजों को सौंप दिया। राजा ने इसे 1668 में ईस्ट इंडिया कम्पनी को सौंप दिया।



वो दो दिन कौन से होते हैं, जब दिन और रात बराबर होते हैं? –तबस्सुम हाशमी, जामियानगर
विषुव अंग्रेज़ी में इसे इक्विनॉक्स कहते हैं। यानी ऐसा समय-बिंदु, जिसमें दिन और रात बराबर। किसी इलाके में दिन और रात की लंबाई पर असर डालने वाली कई बातें होतीं हैं। धरती अपनी धुरी पर २३½° झुककर सूर्य के चक्कर लगाती है, इस प्रकार वर्ष में एक बार पृथ्वी इस स्थिति में होती है, जब वह सूर्य की ओर झुकी रहती है, व एक बार सूर्य से दूसरी ओर झुकी रहती है। इसी प्रकार वर्ष में दो बार ऐसी स्थिति भी आती है, जब पृथ्वी का झुकाव न सूर्य की ओर ही होता है, और न ही सूर्य से दूसरी ओर, बल्कि बीच में होता है। इसे इक्विनॉक्स कहा जाता है। इन दोनों तिथियों पर दिन और रात की बराबर लंबाई लगभग बराबर होती है। ऐसा भूमध्य रेखा पर होगा। आजकल ऐसा 20/21 मार्च और 22/23 सितम्बर को होता है। पर यह भी अलग-अलग अक्षांश यानी लैटीट्यूड पर अलग-अलग दिन होता है।

रेनबो डाइट क्या होती है?-इन्दु सैनी, मेहरौली
रेनबो डाइट का शाब्दिक अर्थ है इन्द्रधनुषी डाइट। यानी इन्द्रधनुष को रंगों का भोजन। व्यावहारिक मतलब है तरह-तरह के रंगों के फलों और सब्जियों का भोजन जो स्वास्थ्य के लिए बेहतरीन होता है। फलों और सब्जियों के तमाम रंग होते हैं और हर रंग का अपना गुण होता है।

मैकमहोन लाइन क्या होती है?-कपिल गोसाईं, पानीपत 
मैकमहोन रेखा भारत और तिब्बत के बीच सीमा रेखा है। सन् 1914 में भारत की तत्कालीन ब्रिटिश सरकार और तिब्बत के बीच शिमला समझौते के तहत यह रेखा तय की गई थी। 1914 के बाद कई साल तक इस रेखा को लेकर कोई विवाद नहीं हुआ, पर 1937 में ओलफ केरो नामक एक अंग्रेज प्रशासनिक अधिकारी ने तत्कालीन अंग्रेज सरकार को इसे आधिकारिक तौर पर लागू करने का अनुरोध किया। 1937 में सर्वे ऑफ इंडिया के एक मानचित्र में मैकमहोन रेखा को आधिकारिक भारतीय सीमारेखा के रूप में पर दिखाया गया था। इस सीमारेखा का नाम सर हैनरी मैकमहोन के नाम पर रखा गया था, जिनकी इस समझौते में महत्त्वपूर्ण भूमिका थी। वे भारत की तत्कालीन अंग्रेज सरकार के विदेश सचिव थे।

महाभारत में अक्षय पात्र क्या था?-परिक्षित मेहता, गुड़गाँव
महाभारत मे अक्षय पात्र का जिक्र आता है| पांचों पांडव द्रौपदी के साथ बारह वर्षों के लिए वनवास जाते हैं। जंगल में प्रवास करते हुए सैकडों साधु-संत और धर्मात्मा पुरूष उनके साथ हो जाते हैं। वे छ: प्राणी अकेले भोजन कैसे करें, और उन सैकडों हजारों के लिए भोजन कहां से आए? पुरोहित धौम्य उन्हें सूर्य की आराधना करने के लिए सूरज के 108 नाम देकर कहते हैं- युधिष्ठिर इन नामों का जाप करते हैं। युधिष्ठिर बडी आस्था से जाप करते हैं। सूर्य प्रसन्न होकर पूजा अर्चना के पीछे युधिष्ठिर की इच्छा जानना चाहते हैं। युधिष्ठिर हजारों लोगों को भोजन कराने की अपनी असमर्थता व्यक्त करते हैं। वे सूर्य देवता से अन्न की अपेक्षा रखते हैं। उन्हें खिलाने के साधन मांगते हैं। सूर्यदेव एक ताम्बे का पात्र देकर उन्हें कहते हैं- "युधिष्ठिर! तुम्हारी कामना पूर्ण हो। मैं बारह वर्ष तक तुम्हें अन्नदान करूंगा। यह ताम्बे का बर्तन मैं तुम्हें देता हूं। तुम्हारे पास फल, फूल, शाक आदि चार प्रकार की भोजन सामग्रियां तब तक अक्षय रहेंगीं, जब तक द्रौपदी परोसती रहेगी।" ताम्बे का वह अक्षय पात्र लेकर युधिष्ठिर धन्य हुए। कथा के अनुसार द्रौपदी हजारों लोगों को परोस कर ही भोजन ग्रहण करती थी, जब तक वह भोजन ग्रहण नहीं करती, पात्र से भोजन समाप्त नहीं होता था।

नोबेल प्राइंज़ की शुरूआत किसने की और यह किन श्रेणियों में दिया जाता है?-अख्तर, निजामुद्दीन वेस्ट 
नोबेल पुरस्कार की स्थापना स्वीडन के वैज्ञानिक अल्फ्रेड बर्नाड (बर्नहार्ड) नोबेल की याद में 1901 में की गई थी। उनका जन्म 1833 ई. में स्वीडन के शहर स्टॉकहोम में हुआ था। उन्होंने 1866 में डाइनामाइट की खोज की। स्वीडिश लोगों को 1896 में उनकी मृत्यु के बाद ही पुरस्कारों के बारे में पता चला, जब उन्होंने उनकी वसीयत पढ़ी, जिसमें उन्होंने अपने धन से मिलने वाली सारी वार्षिक आय पुरस्कारों की मदद करने में दान कर दी थी। अपनी वसीयत में उन्होंने आदेश दिया था कि "सबसे योग्य व्यक्ति चाहे वह स्केडीनेवियन हो या ना हो पुरस्कार प्राप्त करेगा।" उनके द्वारा छोड़े गए धन पर मिलने वाला ब्याज उन व्यक्तियों के बीच वार्षिक रूप से बाँटा जाता है। शांति, साहित्य, भौतिकी, रसायन, चिकित्सा विज्ञान और अर्थशास्त्र के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान करने वालों को हर साल यह पुरस्कार दिया जाता है। पहले नोबेल पुरस्कार पाँच विषयों में कार्य करने के लिए दिए जाते थे। अर्थशास्त्र के लिए पुरस्कार स्वेरिजेश रिक्स बैंक, स्वीडिश बैंक द्वारा अपनी 300वीं वर्षगाँठ के उपलक्ष्य में 1967 में आरम्भ किया गया और इसे 1969 में पहली बार प्रदान किया गया। इसे अर्थशास्त्र में नोबेल स्मृति पुरस्कार भी कहा जाता है।

दुनिया में सात अजूबे हैं कि आठ? नाम बताएं।–अमित भाटिया, मेरठ, यूपी 
1.गीज़ा का विशाल पिरामिड (मिस्र), 2.बेबीलोन के झूलते बागीचे (इराक), 3.सिकन्दरिया का प्रकाश स्तम्भ (मिस्र), 4.ओलम्पिया में जियस की मूर्ति (यूनान), 5 हैलिकारनेसस का मकबरा (तुर्की), 6.आर्तिमिस का मंदिर (तुर्की), 7. रोड्‌स के कोलोसस की मूर्ति (यूनान)।

दुनिया में सबसे पहली किताब किसने लिखी?-फिरदौस कामिल, नजीबाबाद 
फिरदौस साहब यह कहना मुश्किल है कि दुनिया की पहली किताब किसने लिकी, क्योंकि हमारे पास जानकारी का जो ज़रिया है वह ऐतिहासिक जानकारी है। अलबत्ता बुल्गारिया के नेशनल म्यूज़ियम ऑफ हिस्ट्री में सोने के पन्नों पर लिखी एक किताब रखी है जो तकरीबन ढाई हजार साल पुरानी है। पर किताबें इसके काफी पहले लिखी गईं होंगी। पेड़ की छालों, पत्तों, मिट्टी की पट्टियों और पत्थरों पर भी। भारत में किताबें याद की गईं। जैसे ऋग्वेद और महाभारत जैसी किताबों सैकड़ों साल तक मुँह-ज़बानी एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को हस्तांतरित होती रहीं। इंसान ने लिखना सभ्यताओं के पहले शुरू कर दिया था।

पूरे विश्व में कितने देश हैं?- मुहम्मद असलम, बलजीत नगर नई दिल्ली 
दुनिया के पूर्ण सम्प्रभुता सम्पन्न देशों की संख्या 194 है। इनमें से 192 संयुक्त राष्ट्र-सदस्य हैं। वैटिकन सिटी को सम्प्रभुता सम्पन्न राज्य की मान्य परिभाषाओं में रखा जा सकता है, पर वह संयुक्त राष्ट्र का सदस्य नहीं केवल स्थायी पर्यवेक्षक है। संयुक्त राष्ट्र के 193 सदस्य देशों के अलावा कुछ राजव्यवस्थाएं और हैं, जिन्हें पूर्ण देश नहीं कहा जा सकता । उनके नाम हैं अबखाजिया, कोसोवो, नागोर्नो–कारबाख, उत्तरी सायप्रस, फलस्तीन, सहरावी गणराज्य, सोमालीलैंड, दक्षिण ओसेतिया, ताइवान, और ट्रांसनिस्ट्रिया। इनकी संख्या 12 है। ये देश किसी न किसी वजह से राष्ट्रसंघ के पूर्ण सदस्य नहीं हैं। हाल में अफ्रीका में एक नए देश का जन्म हुआ है, जिसका नाम है दक्षिणी सूडान। लम्बे अर्से से गृहयुद्ध के शिकार सूडान में पिछले साल जनवरी में एक जनमत संग्रह हुआ, जिसमें जनता ने नया देश बनाने का निश्चय किया है। यह फैसला देश के सभी पक्षों ने मिलकर किया है। नए देश ने 9 जुलाई 2011 को औपचारिक ऱूप से जन्म लिया। यह भी संयुक्त राष्ट्र सदस्य है।
एफएमगोल्ड के कार्यक्रम बारिश सवालों की में शामिल



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