Thursday, June 30, 2016

नोटों पर महात्मा गांधी की फोटो कब से लगाई गई और क्यों?

नोटों पर राष्ट्रीय नेताओं के चित्र लगाने की परम्परा दुनिया भर में है. महात्मा गांधी हमारे देश के सबसे सम्मानित महापुरुषों में एक हैं, इसलिए उनका चित्र लगाया जाता है. नोटों की वर्तमान सीरीज़ को महात्मा गांधी या एमजी सीरीज़ कहा जाता है. इन नोटों को जाली नोटों से अलग रखने के लिए इनकी खास तरह की छपाई की गई है. यह 1996 से चल रही है. शुरू में 10 और 500 रुपए के नोट इस सीरीज़ में आए थे. अब 5 से 1000 तक नोट इस सीरीज़ में आ रहे हैं. कुछ समय के लिए इन्हें रोका गया था, पर 2009 में इन्हें फिर से शुरू कर दिया गया. इस विषय पर और अधिक जानकारी पाने के लिए रिजर्व बैंक की इस साइट पर जाएं

इंजेक्शन या सूई लगाने से पहले स्पिरिट क्यों लगाया जाता है?

इंजेक्शन लगाने के पहले सर्जिकल स्पिरिट का इस्तेमाल किया जाता है. यह आमतौर मिथाइल और इथाइल अल्कोहल का मिश्रण होता है. मिथाइल सैलिसाइलेट और आइडोफॉर्म का इस्तेमाल भी इस काम के लिए किया जाता है. मूलत: यह डिसइंफैक्टेंट है. यानी विषाणुओं के संक्रमण की संभावना को खत्म करने के लिए इसे लगाया जाता है.

मेट्रो ट्रेन क्या बिना चालक एवं गार्ड के चलती हैं?                                            
दुनिया में कम से कम 32 मेट्रो अपने यहाँ ड्राइवर-रहित ट्रेनें संचालित करते हैं. इससे ज्यादा ट्रेनों पर काम चल रहा है. दिल्ली मेट्रो भी जल्द बिना चालक की गाड़ियाँ चलाने वाली है. सन 1967 में लंदन की अंडरग्राउंड विक्टोरिया लाइन की शुरूआत ऑटोमेटेड ट्रेन से हुई. इसी तरह की मेट्रो गाड़ियाँ कोपेनहेगन, बार्सिलोना और पेरिस में चलती हैं. जापान, हांगकांग, ताइपेह, सिंगापुर और दुबई समेत अनेक स्थानों पर गाड़ियाँ बगैर ड्राइवर के चलतीं है. दर असल इस तरह के रेलवे में सिग्नल से लेकर संचार तक तमाम चीजें कम्प्यूटर नियंत्रित और स्वचालित हो चुकीं हैं. कई जगह एक-दो व्यक्तियों का स्टाफ दरवाजे खोलने या आपातकालीन परिस्थितियों में काम करने के लिए भी रखा जाता हैं. मोटे तौर पर देखें तो ड्राइवर को ट्रेन चलाने के लिए एक या दो बटन दबाने होते हैं. उसे अपने कंट्रोलर के निर्देशों पर यह काम करना होता है. ट्रेन कंट्रोल भी अब ऑटोमेटिक हो गया है. ट्रेन ही नहीं अब हवाई जहाज उड़ाने के अनेक काम ऑटोमेटिक होते हैं.

मछलियां और पानी में रहने वाले दूसरे जीव-जन्तु कब एवं कैसे सोते हैं.

मछलियाँ भी सोती हैं, पर उस तरह नहीं जैसा हम समझते हैं. उसकी आँख की पुतलियाँ बंद नहीं होतीं तो हमें लगता है कि वे जागती रहती हैं. अपने एक्वेरियम में आप ध्यान से देखें तो पाएंगे कि कई बार मछली अपेक्षाकृत शांत या गतिविधि-हीन अवस्था में होती है. वही उसकी नींद है.

छींक आते समय आंखें क्यों बंद हो जाती हैं?

छींक एक अनैच्छिक क्रिया है जो किसी वाह्य उद्दीपन या पदार्थ के श्वास नली में आ जाने के कारण होती है. इसका प्रयोजन उसे बाहर निकाल फेंकना होता है. यह प्रक्रिया एक रिफ्लेक्स है जो स्नायुओं द्वारा संचालित होती  है. क्षण भर के अंतराल में श्वास नली की हवा मांसपेशियों के संकुचन से बाहर फेंक दी जाती है. जोर-से उत्पन्न झटके का असर आंखों की मांसपेशियों पर भी पड़ता है और ‘आई-बॉल’ को बाहर की ओर का धक्का न लगे इसलिए आंखें कसकर बंद हो जाती हैं.

शास्त्रीय संगीत में घरानों का प्रचलन कब शुरू हुआ?

शास्त्रीय संगीत में घरानों का प्रचलन सोलहवीं सदी में ग्वालियर घराने से शुरू हुआ. घराना उस संगीत परिवार का प्रचलन, सामाजिक स्तर को दर्शाता है. इसका सामाजिक महत्व होता है. संगीत घराने परिवार का हर सदस्य शास्त्रीय संगीत का ज्ञाता होता है. हिन्दुस्तानी संगीत के कुछ प्रसिद्ध घराने हैं आगरा, ग्वालियर, इंदौर, जयपुर, किराना और पटियाला.

प्रभात खबर अवसर में प्रकाशित

2 comments:

  1. बहुत अचछी जानकारी। बहुत आभार आपका।

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  2. बहुत ही रोचकपूर्ण जानकारी प्रस्तुति हेतु अाभार!

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