Sunday, December 10, 2017

मुद्रा योजना क्या है?

प्रधानमंत्री मुद्रा योजना मुद्रा बैंक के तहत एक भारतीय योजना है जिसकी शुरुआत प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 8 अप्रैल 2015 को नई दिल्ली में की थी. मुद्रा शब्द माइक्रो यूनिट्स डेवलपमेंट एंड रिफाइनेंस एजेंसी का संक्षिप्त रूप है. इस योजना के तहत 10 लाख रूपये तक का लोन प्रदान किया जाना है. देश में नए उद्यमियों के रूप में छोटे संगठनों, कम्पनियों और स्टार्ट अप्स की संख्या बढ़ रही है. इन्हें सूक्ष्म इकाई माना जाता है. यह महसूस किया गया है कि इन इकाइयों में वित्तीय समर्थन में कमी है. यदि इन्हें वित्तीय सहायता प्रदान की जाए तो उनका विकास हो सकता है.

मुद्रा बैंक के तहत तीन श्रेणियां है -शिशु ,किशोर और तरुण. शिशु शुरूआती श्रेणी है. वे सभी व्यापार जो अभी– अभी शुरू हुए है और लोन के लिए देख रहे है इस श्रेणी में आते है. इस श्रेणी में 50,000 रूपये तक का लोन दिया जाएगा. इसमें ब्याज दर 10 से 12 % तक की रेंज में है. किशोर श्रेणी उनके लिए है जिन्होंने अपना कारोबार शुरू किया है और अब वह प्रतिष्ठित हो रहा है. इस श्रेणी में आने वाली यूनिट्स के लिए 50,000 रूपये से लेकर 5 लाख रूपये तक का लोन देने का प्रावधान है. ब्याज दर 14 से 17% तक की रेंज में है. तरुण श्रेणी के अंतर्गत सभी छोटे कारोबार जो स्थापित हो कर प्रतिष्ठित हो गए हैं। इन्हें 10 लाख रूपये तक का लोन दिया जा सकता है. ब्याज दर 16 % से शुरू होती है.

धरती कभी धूमकेतु की पूँछ से गुजरे तो क्या होगा?

खास बात यों तो कुछ नहीं होगी. अलबत्ता हमें आकाश में आतिशबाजी का नजारा देखने को जरूर मिलेगा. इसकी वजह धूमकेतु की वह धूल होगी जो धरती के वातावरण से रगड़ खाकर जलेगी. वैसे ही जैसे उल्काओं के टकराने से होता है. धूमकेतुओं को लेकर तमाम तरह की बातें उड़ाई जाती रहीं हैं. मसलन 18 मई 1910 को प्रसिद्ध हेली धूमकेतु को धरती और सूरज के बीच से होकर गुजरना था. उस परिघटना के पहले से अखबारों में खबरें छपने लगीं कि इसकी पूँछ में सायनोजेन नाम की जहरीली गैस होगी. उस गैस से बचाव के लिए औषधि की ईजाद भी कर ली गई और ये गोलियाँ खूब बिकीं. वास्तव में जब धूमकेतु गुजरा तो बहुत से लोगों को नजर भी नहीं आया, क्योंकि सूरज की ओर देखना आसान नहीं होता.

कांटे-चम्मच का आविष्कार कैसे हुआ?

काँटे और चम्मच का इस्तेमाल एक साथ शुरू नहीं हुआ. शुरू में चाकू और काँटे का इस्तेमाल हुआ शिकार के लिए. इंसान ने खाने की शुरुआत हाथ से ही की थी. मांसाहारी समाजों में शूल और त्रिशूल के छोटे रूप फॉर्क की जरूरत गोश्त को थाली में रोकने के लिए हुई. चम्मच का आविष्कार पत्थर युग में हुआ. सीपियों की मदद लेते-लेते इंसान को पत्थर की चम्मच बनाने का विचार आया होगा. बाद में लकड़ी की चम्मचें भी बनीं.

कीड़े-मकोड़े पानी पर बिना डूबे कैसे चलते रहते हैं?



आमतौर पर कीड़ों का वजन इतना कम होता है कि वे पानी के पृष्ठ तनाव या सरफेस टेंशन को तोड़ नहीं पाते. पानी और दूसरे द्रवों का एक गुण है जिसे सरफेस टेंशन कहते हैं. इसी गुण के कारण किसी द्रव की सतह किसी दूसरी सतह की ओर आकर्षित होती है. पानी का पृष्ठ तनाव दूसरे द्रवों के मुकाबले बहुत ज्यादा होता है. इस वजह से बहुत से कीड़े मकोड़े आसानी से इसके ऊपर टिक सकते हैं. इन कीड़ों का वजन पानी के पृष्ठ तनाव को भेद नहीं पाता. सरफेस टेंशन एक काम और करता है. पेन की रिफिल या कोई महीन नली लीजिए और उसे पानी में डुबोएं. आप देखेंगे कि पानी नली में काफी ऊपर तक चढ़ आता है. पेड़ पौधे ज़मीन से पानी इसी तरीके से हासिल करते है. उनकी जड़ों से बहुत पतली पतली नलियां निकलकर तने से होती हुई पत्तियों तक पहुंच जाती हैं. सन 1995 में प्रतिमाओं के दूध पीने की खबर फैली थी. वस्तुतः पृष्ठ तनाव के कारण चम्मच का दूध पत्थर की प्रतिमा में ऊपर चढ़ जाता था. इसे लोगों ने प्रतिमाओं का दूध पीना घोषित कर दिया.

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